नरसिंहपुर।
जिले की आम जनता की सेहत के साथ खिलवाड़ हो रहा है। जगह जगह क्लीनिक खुल गए हैं। यहां बी ए एम एस, बी यू एम एस और बी एच एम एस एलोपैथी की दवा लिखते हैं। अधिकतर क्लीनिक में स्वास्थ्य विभाग का रजिस्ट्रेशन नंबर नहीं लिखा होता है,जो की नर्सिंग होम एक्ट का उलंघन है इस तरह की गलती पर ५०० से ५०००० तक के जुर्माने का प्रावधान है। बी ए एम एस डिग्री धारी को नाम के आगे आयुर्वेदाचार्य लिखना चाहिए, वह डॉक्टर शब्द नहीं लिख सकता है। चिकित्सा शिक्षा संस्थान नियंत्रण अधिनियम १९७३,७(ग) के तहत डॉक्टर शब्द का उपयोग रजिस्टर्ड मेडिकल प्रैक्टिशनर ही कर सकते हैं। उलंघन करने पर ५० हजार रूपए का जुर्माना व तीन साल तक सजा हो सकती है। परन्तु ये झोलाछाप डॉक्टर बेधड़क अपनी मन मर्जी से इलाज करते हैं। जिसके कारण कई बार लोगों की मौत तक हो जाती है। परन्तु स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही के चलते ये झोलाछाप अपने काम को निडर होकर अंजाम देते हैं।
जिले की आम जनता की सेहत के साथ खिलवाड़ हो रहा है। जगह जगह क्लीनिक खुल गए हैं। यहां बी ए एम एस, बी यू एम एस और बी एच एम एस एलोपैथी की दवा लिखते हैं। अधिकतर क्लीनिक में स्वास्थ्य विभाग का रजिस्ट्रेशन नंबर नहीं लिखा होता है,जो की नर्सिंग होम एक्ट का उलंघन है इस तरह की गलती पर ५०० से ५०००० तक के जुर्माने का प्रावधान है। बी ए एम एस डिग्री धारी को नाम के आगे आयुर्वेदाचार्य लिखना चाहिए, वह डॉक्टर शब्द नहीं लिख सकता है। चिकित्सा शिक्षा संस्थान नियंत्रण अधिनियम १९७३,७(ग) के तहत डॉक्टर शब्द का उपयोग रजिस्टर्ड मेडिकल प्रैक्टिशनर ही कर सकते हैं। उलंघन करने पर ५० हजार रूपए का जुर्माना व तीन साल तक सजा हो सकती है। परन्तु ये झोलाछाप डॉक्टर बेधड़क अपनी मन मर्जी से इलाज करते हैं। जिसके कारण कई बार लोगों की मौत तक हो जाती है। परन्तु स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही के चलते ये झोलाछाप अपने काम को निडर होकर अंजाम देते हैं।