मन करता है कि कलम को तोड़ दूं।
हालत ऐसे मत बनाओ की लिखना ही छोड़ दूं।
।। विक्रम।।
Newslive88
दोस्ती पर हद से ज्यादा ऐतबार मत करना मेरे दोस्त।
बहुत तड़पाते हैं अक्सर दिल के घरौंदे छोड़कर जाने वाले।।
।। विक्रम ।।
सच की बुनियाद पर झूठ का व्यापार है।
सम्हल कर चलना जरा ये मेरे शहर का बाजार है।
।। विक्रम ।।
Newslive88
तुम्हारे आसुओं की स्याही से हर बात लिखूंगा।
जैसे भी है हालात उन्हें दिन रात लिखूंगा।
।।विक्रम।।
Newslive88
बच्चादानी निकल जाए तो भी शोर नहीं चलता।
ये जिला चिकित्सालय है यारो किसी का जोर नहीं चलता।
।। विक्रम ।।
Newslive88
अख़बारों में शोर है जिम्मेदार चोर है।
हादसों के शहर में उम्मीदों का दौर है।।
।। विक्रम ।।
Newslive88
बदनसीबी पर रोज आंसु बहा रहे हैं।
मैंने देखा है बच्चे स्कूल की जगह काल के गाल में समा रहे हैं।
।। विक्रम ।।
Newslive88
नशा विरोधी अभियानों को कागज में मत रुकने दो।
मौत कर रही तांडव देखो कदम अभी ना थकने दो ।
सत्ता के राजस्व ना देखो
जनता को भी कहने दो।
बहुत कह चुका अब तक विक्रम ,अभय क्रांति ना थमने दो।।
।। विक्रम ।।
Newslive88
Newslive88:
एकदिन मेरी मौत का तमाशा बनेगा।
लिखा है अब तक जो अफसाना बनेगा।
।। विक्रम ।।
Newslive88
अभय जान कर दुनिया को अब ।
जनता को मत डरने दो।।
कौन लड़ेगा हक की लड़ाई।
अभियानों को ना थमने दो।।
।। विक्रम ।।
इस क़दर खामोशियां महसूस हो रही है।
विकास चल रहा है या जनता सो रही है।
।। विक्रम ।।
Newslive88
सब यहां धनवानों के करीबी हैं।
तुम्हे अहसास नहीं है भारत में
कितनी गरीबी है।
।। विक्रम।।
Newslive88
आंखों में धुआं सीने में जलन महसूस होती है।
ना जाने क्यूं लफ्जों में घुटन महसूस होती है।
।। विक्रम।।
Newslive88
सत्ता के गलियारे में सच कि बोली लगती है, ना जाने क्यूं
तमाम उलझनें खामोश लगती है।
देश के विकास को आंखे तरस रही है।
किसान के जिस्म पर अब तो लाठियां बरस रही है।
।।विक्रम।।
ऐसा लगता है इन्कलाब आएगा।
भ्रष्टाचार खत्म होगा इक बदलाव आएगा।
।। विक्रम।।
जनता की तो ऐसी तैसी सत्ता का गुणगान किया।
कलम बेचकर भाटों ने बस अपना ही नाम किया।
।। विक्रम ।।
Newslive88.:
जनताकी तो ऐसी तैसी बस अपना गुणगान किया।
कलम बेचकर भाटों ने बस अपना ही नाम किया।
।। विक्रम ।।
Newslive88.:
तस्वीरोंके अंबारों में खेल यहां पर रचते हो।चाटुकारिता की स्याही से नाम फरेब के रचते हो।
।। विक्रम ।।Newslive88.:
ए मेरी कलम तुम बिकना नहीं।
चापलूसी और फरेब लिखना नहीं ।
।। विक्रम ।।
विकास की वाहवाही से दूर सच और भी है।
नजर उठाकर देखो आम जनता के दर्द और भी है।
।। विक्रम ।।
Newslive88
हालात बद्तर है शहर के यह माना मैंने।
सियासतों के खेल को अब जाना मैंने।
।। विक्रम ।।
तमाम खामोशियों में राज गहरे हैं।
सम्हल कर रहना यहां हर कदम पर पहरे हैं।
।। विक्रम।।
मेरे हालात पर रहम खाने वालों।
ऐसे तो दिल ना दुखाओ मुझे चाहने वालों।
।। विक्रम ।।
मेरे अल्फ़ाज़ दिल से मिटा देना ।
की अब मुझको मर जाने की दुआ देना।
।। विक्रम ।।
तुम्हारे दर्द मैंने आंखो में देखे थे।
लोग समझ बैठे की हम ख्वाब में हैं।
।। विक्रम ।।
सितारों की महफिल सजी है अब भी।
लेकिन अब हम शरीक नहीं होते।
।। विक्रम ।।
गुज़र जाने दो इन यादों के तूफानों को।
ना जाने क्या खो चुका हूं इन तूफानों में।
।। विक्रम ।।
_____&_____&_____&_____
जानता हूं आज कल तुम परेशान रहते हो लेकिन आज भी बेपरवाह मैं भी नहीं
जानता हूं तुम खामोश रहते हो
मगर महफिलों में मै भी नहीं
जानता हूं तुम रातों को जागा करते हो बरसों से सोया तो मै भी नहीं
जानता हूं तुम चुपके चुपके रोते हो तुम्हारे बिना मुस्कुराया तो मै भी नहीं।
।। विक्रम ।।
_______&_________&_____
कभी नफरत तो कभी मोहब्बत का हिस्सा हूं।
मैं चंद अल्फाज का एक छोटा सा किस्सा हूं।।
।। विक्रम ।।
Newslive88
आजकल कलम भी लफ्जों से बेवफ़ाई करती है।
छुपाकर दर्द स्याही में मुस्कुराहट बयान करती है।
।। विक्रम ।।
कभी पत्थर कभी देवता कहां ऐसे अरमान है ।
मेरी परछाई है मेरे लफ्ज़ बस यही मेरी पहचान है।
।। विक्रम ।।
ना जाने कितनी बातें की हैं तन्हाइयों से मैंने,
और तुमने समझा मैंने लिखना छोड़ दिया।
हालात से समझौते या नीलामी का हिस्सा,
कलम का मेरी इनसे रिश्ता ही तोड़ दिया।
और तुमने समझा मैंने लिखना ही छोड़ दिया।
अश्क आंखों के छुपाकर मुस्कुराता हूं अक्सर ,
अपनी उम्मीदों से मैंने मुंह मोड़ लिया।
और तुमने समझा मैंने लिखना ही छोड़ दिया।
।। विक्रम ।।
मेरी आंखों पर भी अब काली पट्टी बांध दो।
की अब मुझको भी तबाही के मंजर अच्छे नहीं लगते।
।। विक्रम ।।
मैंने अब तक जमीन ओ आसमां को कभी परेशां नहीं देखा।
दरिया और पहाड़ों को हिन्दू या मुसलमान नहीं देखा।
।। विक्रम ।।
सत्ता की बातें में सच कहां दिखता है।
दो रोटी के लिए भी यहां जिस्म बिकता है।।
।। विक्रम ।।
रात मैंने उलझनों से मैंने पूछा , तुम सुलझती क्यो नहीं।
खामोशी के साथ मुस्कुरा कर बोली , तेरे लफ्जों का वजूद ही हमारी उलझनों में है।
।। विक्रम ।।
महसूस होता है कि अब जान बाकी नहीं ।बहुत खूबसूरत है दुनिया लेकिन अरमान बाकी नहीं।।
।। विक्रम ।।
मौत से पहले मौत का इंतजार कौन करे।
ए जिंदगी तेरा ऐतबार अब कौन करे।
।। विक्रम ।।
अपनी चिता को आग लगाकर जिंदा हूं।
जिंदगी तेरे हर सवाल से शर्मिंदा हूं।।
।। विक्रम ।।
आज खुशियों से मुंह मोड़ आया हूं।
मैं खुद को ही तन्हा छोड़ आया हूं।
।। विक्रम ।।
आस्तिनों में खंजर छुपा कर रखने वालों।
मेरी मौत की तारीख तो बता दो मुझे।
।। विक्रम ।।
मेरे लफ्जों में मैंने दर्द छुपाकर रखें है।
मेरे अश्कों की कहानी अश्कों से लिखते लिखते।
।। विक्रम ।।
रोज शाम ढल जाती है उम्मीदों की शमा ।
ना जाने क्यूं अब बातों पर ऐतबार नहीं होता।
।। विक्रम ।।
भय और लोकलाज की वजह से नहीं की जाने वाली शिकायतों को भी शहर की शांति व्यवस्था ही माना जाए।
।। विक्रम ।।
कभीसोएंगे हम भी कफ़न ओढ़कर।आज तो तन्हाइयों से फुर्सत ही नहीं मिलती।
वो और होंगे जिन्हें मिलती होगी खुशी।
हमें तो जीने के लिए जिंदगी भी नहीं मिलती।।
।। विक्रम ।।
सिलसिलोंका टूटना भी जरूरी है।
जो मिले है तो बिछड़ना भी जरूरी है।।
दर्द की दास्तां लिखना जो चाहा कभी।
अश्कों का पलकों पर बिखरना जरूरी है।
।। विक्रम ।।
जो दर्द दे सको तो हंसकर कबूल है।
मेरी जिंदगी का यहीं उसूल है।
।। विक्रम ।।
मुस्कुराने की दुआ भी अब बद्दुआ लगती है।चलो सफर पर विक्रम तन्हा जिंदगी भी बेवफा लगती है।।
।। विक्रम ।।
क्यूंतडपाती है ए जिंदगी तू भी।
कहीं तू भी मेरी दोस्त तो नहीं।।
।। विक्रम ।।
चलोअपने ही हाथों से जिंदगी की शाम कर लें।
अपनी खुशियों को आज खुद ही तमाम कर लें।।
मौत का क्या है आती है तो आ जाए।
अब दर्द के लम्हों को भी विक्रम के नाम कर लें।।
।। विक्रम ।।
गुजरे वक़्त की मानिंद लौटकर ना आएंगे।
मेरे इस दौर के बाकी यही निशां होंगे।।
।। विक्रम ।।
[02/03 11:42 pm] Newslive88.: अक्सर सुनसान रास्तों पर चलने लगा हूं।
वो कहते हैं अब मै बदलने लगा हूं।
।। विक्रम ।।
[02/03 11:54 pm] Newslive88.: आज हम भी जिंदगी को सताते हैं,चलो कफ़न ओढ़ कर सो जाते हैं।
अक्सर तुम नाराज होते हो हमसे,चलो आज हम भी तुमसे नाराज हो जाते है।
।। विक्रम ।।
[03/03 12:07 am] Newslive88.: धोखा खा जाते हैं अक्सर चेहरा देखने वाले।
मेरे दर्द का सागर तो मेरी आखों में बहता है।
।। विक्रम ।।
[03/03 12:53 am] Newslive88.: यादों के दर्द समेटे चंद अल्फाज लिखता हूं।
शायरी नहीं दिल के जज़्बात लिखता हूं।
।। विक्रम ।।
[03/03 8:57 am] Newslive88.: तन्हाइयां , दर्द और रंज हमारे साथ रहने दो।
अब खुशियों की अमानत हमसे सम्हाली नहीं जाती।।
।। विक्रम ।।
आज हम अपने अरमानों से मुंह मोड़ लेते हैं।
उनकी खुशी की खातिर खामोशी ओढ़ लेते है।।
।। विक्रम।।
मेरे हौसले की दाद दो मुझको।
किसी को पाकर खोना आसान कहां होता है।
।।विक्रम।।
[04/03 1:43 pm] Newslive88.: तकलीफें ऐसे भी बयां होती हैं।
आंखे नम और खमोश जुबां होती है।
।। विक्रम ।।
[04/03 11:26 pm] Newslive88.: हवा का झोंका हूं पल दो पल में गुजर जाऊंगा।
पढ लो चंद अल्फाज मेरे ना जाने कब बिछड़ जाऊंगा।।
।। विक्रम ।।
[04/03 11:39 pm] Newslive88.: दर्द में डूबे अल्फाज पर गौर करने वाले।
तू भी रोएगा कभी मुझको रुलाने वाले।
।। विक्रम ।।
[04/03 11:55 pm] Newslive88.: और कितना तराशेगा ए वक़्त मुझे ।
इतना आसान नहीं इन्सान का खुदा हो जाना।
।। विक्रम ।।
[05/03 12:04 am] Newslive88.: क्यूं हो उदास इस तरह उम्मीदें भी अधूरी छोड़ जाएंगे।
आवाज लाख भी दोगे तो सांसे अपनी तोड़ जाएंगे।।
।। विक्रम ।।
जाओ अब नहीं लिखेंगे दर्द अपने।
तेरे खातिर कलम भी तोड़ आए है।
टूटती सांसों से भी फर्क नहीं पड़ता।
जिंदगी में ऐसे भी कुछ मकाम आए है।
।। विक्रम ।।
किससे उम्मीद करें इस जहां में ए दोस्त।
यहां तो कांधा भी तुम मरने के बाद दिया करते हो।
।। विक्रम ।।
[08/03 12:01 am] Newslive88.:
चंदटूटे अरमानों के टुकड़े उठाने की कोशिशें की थी।
हाथो की उंगलियां यूं ही लहूलुहान नहीं होती।
।। विक्रम ।।
[08/03 12:32 am] Newslive88.:
मेरी सलामती की दुआ जो किया करते थे कभी।
सुना है आज वे ही मेरे वास्ते खंजर खरीदते हैं।
।। विक्रम ।।
[08/03 1:28 am] Newslive88.:
वक़्तके साथ लोगों के जज़्बात बदलते देखे है।
गर्दिश के दौर में अक्सर खयालात बदलते देखे हैं।
उम्मीद क्या कीजिएगा किसी और से यहां।
मजबूरीयों के नाम पर ताल्लुकात बदलते देखे है।
।। विक्रम ।।
[08/03 2:04 am] Newslive88.:
शामवो मेरी आंखो में नमी देखकर बोले।
इतना दर्द सहने से विक्रम मर जाओ तो बेहतर है।
।। विक्रम ।।
[08/03 10:17 am] Newslive88.: मजबुर थे तो प्यार ही नहीं करना था।
तुम्हारे नाम पर कोई जीता मरता है।।
महफिलों की रौनक मुबारक हो तुम्हे।
तन्हाइयों में भी तुम्हे याद किया करता है।
[08/03 10:24 am] Newslive88.: तमाम तस्वीरें बेजान सी लगती हैं।
तेरे दो आसुओं की कशिश में डूबकर देखा।
।। विक्रम ।।
[08/03 10:28 am] Newslive88.: लिखते लिखते उम्र तमाम हो जाएगी।
कुछ इस तरह जिंदगी की शाम हो जाएगी।
।। विक्रम ।।
मेरी बर्बादियों में कौन शामिल है आखिर।
मेरे अपने ही मेरे राजदार है यारों।।
।। विक्रम।
अश्क बनकर स्याही हर अल्फ़ाज़ में उतर जाते हैं।
मेरे इस दर्द की तासीर ही कुछ ऐसी है।
।। विक्रम ।।
[11/03 1:31 pm] Newslive88.: बख्श दो मुझको अब गमो की दौलत ।
दर्द के बगैर जिंदगी बे मजा लगती है।
।। विक्रम ।।
[11/03 1:33 pm] Newslive88.: दर्द के बगैर जीना कैसा।
यही तो तुम्हारी इनायतें है।
।। विक्रम।।
[11/03 3:10 pm] Newslive88.: खरीददार और भी है इस शहर में।
मेरी कीमत ना लगाओ यारों।
।। विक्रम ।।
गौर से देखो इस लाश को यह भी इक इंसान था।
मरने के पहले तक हिन्दू और मुसलमान था।
सिक्कों के खातिर सरहदों में बाट दिया है सबको।
चन्द सिक्कों में बिक गया वो कैसा ईमान था।
।। विक्रम।।
हालत ऐसे मत बनाओ की लिखना ही छोड़ दूं।
।। विक्रम।।
Newslive88
दोस्ती पर हद से ज्यादा ऐतबार मत करना मेरे दोस्त।
बहुत तड़पाते हैं अक्सर दिल के घरौंदे छोड़कर जाने वाले।।
।। विक्रम ।।
सच की बुनियाद पर झूठ का व्यापार है।
सम्हल कर चलना जरा ये मेरे शहर का बाजार है।
।। विक्रम ।।
Newslive88
तुम्हारे आसुओं की स्याही से हर बात लिखूंगा।
जैसे भी है हालात उन्हें दिन रात लिखूंगा।
।।विक्रम।।
Newslive88
बच्चादानी निकल जाए तो भी शोर नहीं चलता।
ये जिला चिकित्सालय है यारो किसी का जोर नहीं चलता।
।। विक्रम ।।
Newslive88
अख़बारों में शोर है जिम्मेदार चोर है।
हादसों के शहर में उम्मीदों का दौर है।।
।। विक्रम ।।
Newslive88
बदनसीबी पर रोज आंसु बहा रहे हैं।
मैंने देखा है बच्चे स्कूल की जगह काल के गाल में समा रहे हैं।
।। विक्रम ।।
Newslive88
नशा विरोधी अभियानों को कागज में मत रुकने दो।
मौत कर रही तांडव देखो कदम अभी ना थकने दो ।
सत्ता के राजस्व ना देखो
जनता को भी कहने दो।
बहुत कह चुका अब तक विक्रम ,अभय क्रांति ना थमने दो।।
।। विक्रम ।।
Newslive88
Newslive88:
एकदिन मेरी मौत का तमाशा बनेगा।
लिखा है अब तक जो अफसाना बनेगा।
।। विक्रम ।।
Newslive88
अभय जान कर दुनिया को अब ।
जनता को मत डरने दो।।
कौन लड़ेगा हक की लड़ाई।
अभियानों को ना थमने दो।।
।। विक्रम ।।
इस क़दर खामोशियां महसूस हो रही है।
विकास चल रहा है या जनता सो रही है।
।। विक्रम ।।
Newslive88
सब यहां धनवानों के करीबी हैं।
तुम्हे अहसास नहीं है भारत में
कितनी गरीबी है।
।। विक्रम।।
Newslive88
आंखों में धुआं सीने में जलन महसूस होती है।
ना जाने क्यूं लफ्जों में घुटन महसूस होती है।
।। विक्रम।।
Newslive88
सत्ता के गलियारे में सच कि बोली लगती है, ना जाने क्यूं
तमाम उलझनें खामोश लगती है।
देश के विकास को आंखे तरस रही है।
किसान के जिस्म पर अब तो लाठियां बरस रही है।
।।विक्रम।।
ऐसा लगता है इन्कलाब आएगा।
भ्रष्टाचार खत्म होगा इक बदलाव आएगा।
।। विक्रम।।
जनता की तो ऐसी तैसी सत्ता का गुणगान किया।
कलम बेचकर भाटों ने बस अपना ही नाम किया।
।। विक्रम ।।
Newslive88.:
जनताकी तो ऐसी तैसी बस अपना गुणगान किया।
कलम बेचकर भाटों ने बस अपना ही नाम किया।
।। विक्रम ।।
Newslive88.:
तस्वीरोंके अंबारों में खेल यहां पर रचते हो।चाटुकारिता की स्याही से नाम फरेब के रचते हो।
।। विक्रम ।।Newslive88.:
ए मेरी कलम तुम बिकना नहीं।
चापलूसी और फरेब लिखना नहीं ।
।। विक्रम ।।
विकास की वाहवाही से दूर सच और भी है।
नजर उठाकर देखो आम जनता के दर्द और भी है।
।। विक्रम ।।
Newslive88
हालात बद्तर है शहर के यह माना मैंने।
सियासतों के खेल को अब जाना मैंने।
।। विक्रम ।।
तमाम खामोशियों में राज गहरे हैं।
सम्हल कर रहना यहां हर कदम पर पहरे हैं।
।। विक्रम।।
मेरे हालात पर रहम खाने वालों।
ऐसे तो दिल ना दुखाओ मुझे चाहने वालों।
।। विक्रम ।।
मेरे अल्फ़ाज़ दिल से मिटा देना ।
की अब मुझको मर जाने की दुआ देना।
।। विक्रम ।।
तुम्हारे दर्द मैंने आंखो में देखे थे।
लोग समझ बैठे की हम ख्वाब में हैं।
।। विक्रम ।।
सितारों की महफिल सजी है अब भी।
लेकिन अब हम शरीक नहीं होते।
।। विक्रम ।।
गुज़र जाने दो इन यादों के तूफानों को।
ना जाने क्या खो चुका हूं इन तूफानों में।
।। विक्रम ।।
_____&_____&_____&_____
जानता हूं आज कल तुम परेशान रहते हो लेकिन आज भी बेपरवाह मैं भी नहीं
जानता हूं तुम खामोश रहते हो
मगर महफिलों में मै भी नहीं
जानता हूं तुम रातों को जागा करते हो बरसों से सोया तो मै भी नहीं
जानता हूं तुम चुपके चुपके रोते हो तुम्हारे बिना मुस्कुराया तो मै भी नहीं।
।। विक्रम ।।
_______&_________&_____
कभी नफरत तो कभी मोहब्बत का हिस्सा हूं।
मैं चंद अल्फाज का एक छोटा सा किस्सा हूं।।
।। विक्रम ।।
Newslive88
आजकल कलम भी लफ्जों से बेवफ़ाई करती है।
छुपाकर दर्द स्याही में मुस्कुराहट बयान करती है।
।। विक्रम ।।
कभी पत्थर कभी देवता कहां ऐसे अरमान है ।
मेरी परछाई है मेरे लफ्ज़ बस यही मेरी पहचान है।
।। विक्रम ।।
ना जाने कितनी बातें की हैं तन्हाइयों से मैंने,
और तुमने समझा मैंने लिखना छोड़ दिया।
हालात से समझौते या नीलामी का हिस्सा,
कलम का मेरी इनसे रिश्ता ही तोड़ दिया।
और तुमने समझा मैंने लिखना ही छोड़ दिया।
अश्क आंखों के छुपाकर मुस्कुराता हूं अक्सर ,
अपनी उम्मीदों से मैंने मुंह मोड़ लिया।
और तुमने समझा मैंने लिखना ही छोड़ दिया।
।। विक्रम ।।
मेरी आंखों पर भी अब काली पट्टी बांध दो।
की अब मुझको भी तबाही के मंजर अच्छे नहीं लगते।
।। विक्रम ।।
मैंने अब तक जमीन ओ आसमां को कभी परेशां नहीं देखा।
दरिया और पहाड़ों को हिन्दू या मुसलमान नहीं देखा।
।। विक्रम ।।
सत्ता की बातें में सच कहां दिखता है।
दो रोटी के लिए भी यहां जिस्म बिकता है।।
।। विक्रम ।।
रात मैंने उलझनों से मैंने पूछा , तुम सुलझती क्यो नहीं।
खामोशी के साथ मुस्कुरा कर बोली , तेरे लफ्जों का वजूद ही हमारी उलझनों में है।
।। विक्रम ।।
महसूस होता है कि अब जान बाकी नहीं ।बहुत खूबसूरत है दुनिया लेकिन अरमान बाकी नहीं।।
।। विक्रम ।।
मौत से पहले मौत का इंतजार कौन करे।
ए जिंदगी तेरा ऐतबार अब कौन करे।
।। विक्रम ।।
अपनी चिता को आग लगाकर जिंदा हूं।
जिंदगी तेरे हर सवाल से शर्मिंदा हूं।।
।। विक्रम ।।
आज खुशियों से मुंह मोड़ आया हूं।
मैं खुद को ही तन्हा छोड़ आया हूं।
।। विक्रम ।।
आस्तिनों में खंजर छुपा कर रखने वालों।
मेरी मौत की तारीख तो बता दो मुझे।
।। विक्रम ।।
मेरे लफ्जों में मैंने दर्द छुपाकर रखें है।
मेरे अश्कों की कहानी अश्कों से लिखते लिखते।
।। विक्रम ।।
रोज शाम ढल जाती है उम्मीदों की शमा ।
ना जाने क्यूं अब बातों पर ऐतबार नहीं होता।
।। विक्रम ।।
भय और लोकलाज की वजह से नहीं की जाने वाली शिकायतों को भी शहर की शांति व्यवस्था ही माना जाए।
।। विक्रम ।।
कभीसोएंगे हम भी कफ़न ओढ़कर।आज तो तन्हाइयों से फुर्सत ही नहीं मिलती।
वो और होंगे जिन्हें मिलती होगी खुशी।
हमें तो जीने के लिए जिंदगी भी नहीं मिलती।।
।। विक्रम ।।
सिलसिलोंका टूटना भी जरूरी है।
जो मिले है तो बिछड़ना भी जरूरी है।।
दर्द की दास्तां लिखना जो चाहा कभी।
अश्कों का पलकों पर बिखरना जरूरी है।
।। विक्रम ।।
जो दर्द दे सको तो हंसकर कबूल है।
मेरी जिंदगी का यहीं उसूल है।
।। विक्रम ।।
मुस्कुराने की दुआ भी अब बद्दुआ लगती है।चलो सफर पर विक्रम तन्हा जिंदगी भी बेवफा लगती है।।
।। विक्रम ।।
क्यूंतडपाती है ए जिंदगी तू भी।
कहीं तू भी मेरी दोस्त तो नहीं।।
।। विक्रम ।।
चलोअपने ही हाथों से जिंदगी की शाम कर लें।
अपनी खुशियों को आज खुद ही तमाम कर लें।।
मौत का क्या है आती है तो आ जाए।
अब दर्द के लम्हों को भी विक्रम के नाम कर लें।।
।। विक्रम ।।
गुजरे वक़्त की मानिंद लौटकर ना आएंगे।
मेरे इस दौर के बाकी यही निशां होंगे।।
।। विक्रम ।।
[02/03 11:42 pm] Newslive88.: अक्सर सुनसान रास्तों पर चलने लगा हूं।
वो कहते हैं अब मै बदलने लगा हूं।
।। विक्रम ।।
[02/03 11:54 pm] Newslive88.: आज हम भी जिंदगी को सताते हैं,चलो कफ़न ओढ़ कर सो जाते हैं।
अक्सर तुम नाराज होते हो हमसे,चलो आज हम भी तुमसे नाराज हो जाते है।
।। विक्रम ।।
[03/03 12:07 am] Newslive88.: धोखा खा जाते हैं अक्सर चेहरा देखने वाले।
मेरे दर्द का सागर तो मेरी आखों में बहता है।
।। विक्रम ।।
[03/03 12:53 am] Newslive88.: यादों के दर्द समेटे चंद अल्फाज लिखता हूं।
शायरी नहीं दिल के जज़्बात लिखता हूं।
।। विक्रम ।।
[03/03 8:57 am] Newslive88.: तन्हाइयां , दर्द और रंज हमारे साथ रहने दो।
अब खुशियों की अमानत हमसे सम्हाली नहीं जाती।।
।। विक्रम ।।
आज हम अपने अरमानों से मुंह मोड़ लेते हैं।
उनकी खुशी की खातिर खामोशी ओढ़ लेते है।।
।। विक्रम।।
मेरे हौसले की दाद दो मुझको।
किसी को पाकर खोना आसान कहां होता है।
।।विक्रम।।
[04/03 1:43 pm] Newslive88.: तकलीफें ऐसे भी बयां होती हैं।
आंखे नम और खमोश जुबां होती है।
।। विक्रम ।।
[04/03 11:26 pm] Newslive88.: हवा का झोंका हूं पल दो पल में गुजर जाऊंगा।
पढ लो चंद अल्फाज मेरे ना जाने कब बिछड़ जाऊंगा।।
।। विक्रम ।।
[04/03 11:39 pm] Newslive88.: दर्द में डूबे अल्फाज पर गौर करने वाले।
तू भी रोएगा कभी मुझको रुलाने वाले।
।। विक्रम ।।
[04/03 11:55 pm] Newslive88.: और कितना तराशेगा ए वक़्त मुझे ।
इतना आसान नहीं इन्सान का खुदा हो जाना।
।। विक्रम ।।
[05/03 12:04 am] Newslive88.: क्यूं हो उदास इस तरह उम्मीदें भी अधूरी छोड़ जाएंगे।
आवाज लाख भी दोगे तो सांसे अपनी तोड़ जाएंगे।।
।। विक्रम ।।
जाओ अब नहीं लिखेंगे दर्द अपने।
तेरे खातिर कलम भी तोड़ आए है।
टूटती सांसों से भी फर्क नहीं पड़ता।
जिंदगी में ऐसे भी कुछ मकाम आए है।
।। विक्रम ।।
किससे उम्मीद करें इस जहां में ए दोस्त।
यहां तो कांधा भी तुम मरने के बाद दिया करते हो।
।। विक्रम ।।
[08/03 12:01 am] Newslive88.:
चंदटूटे अरमानों के टुकड़े उठाने की कोशिशें की थी।
हाथो की उंगलियां यूं ही लहूलुहान नहीं होती।
।। विक्रम ।।
[08/03 12:32 am] Newslive88.:
मेरी सलामती की दुआ जो किया करते थे कभी।
सुना है आज वे ही मेरे वास्ते खंजर खरीदते हैं।
।। विक्रम ।।
[08/03 1:28 am] Newslive88.:
वक़्तके साथ लोगों के जज़्बात बदलते देखे है।
गर्दिश के दौर में अक्सर खयालात बदलते देखे हैं।
उम्मीद क्या कीजिएगा किसी और से यहां।
मजबूरीयों के नाम पर ताल्लुकात बदलते देखे है।
।। विक्रम ।।
[08/03 2:04 am] Newslive88.:
शामवो मेरी आंखो में नमी देखकर बोले।
इतना दर्द सहने से विक्रम मर जाओ तो बेहतर है।
।। विक्रम ।।
[08/03 10:17 am] Newslive88.: मजबुर थे तो प्यार ही नहीं करना था।
तुम्हारे नाम पर कोई जीता मरता है।।
महफिलों की रौनक मुबारक हो तुम्हे।
तन्हाइयों में भी तुम्हे याद किया करता है।
[08/03 10:24 am] Newslive88.: तमाम तस्वीरें बेजान सी लगती हैं।
तेरे दो आसुओं की कशिश में डूबकर देखा।
।। विक्रम ।।
[08/03 10:28 am] Newslive88.: लिखते लिखते उम्र तमाम हो जाएगी।
कुछ इस तरह जिंदगी की शाम हो जाएगी।
।। विक्रम ।।
मेरी बर्बादियों में कौन शामिल है आखिर।
मेरे अपने ही मेरे राजदार है यारों।।
।। विक्रम।
अश्क बनकर स्याही हर अल्फ़ाज़ में उतर जाते हैं।
मेरे इस दर्द की तासीर ही कुछ ऐसी है।
।। विक्रम ।।
[11/03 1:31 pm] Newslive88.: बख्श दो मुझको अब गमो की दौलत ।
दर्द के बगैर जिंदगी बे मजा लगती है।
।। विक्रम ।।
[11/03 1:33 pm] Newslive88.: दर्द के बगैर जीना कैसा।
यही तो तुम्हारी इनायतें है।
।। विक्रम।।
[11/03 3:10 pm] Newslive88.: खरीददार और भी है इस शहर में।
मेरी कीमत ना लगाओ यारों।
।। विक्रम ।।
गौर से देखो इस लाश को यह भी इक इंसान था।
मरने के पहले तक हिन्दू और मुसलमान था।
सिक्कों के खातिर सरहदों में बाट दिया है सबको।
चन्द सिक्कों में बिक गया वो कैसा ईमान था।
।। विक्रम।।







































