यादों के कारवां।

यादों के कारवां।

मन करता है कि कलम को तोड़ दूं।
हालत ऐसे मत बनाओ की लिखना ही छोड़ दूं।
।। विक्रम।।
Newslive88
दोस्ती पर हद से ज्यादा ऐतबार मत करना मेरे दोस्त।
बहुत तड़पाते हैं अक्सर दिल के घरौंदे छोड़कर जाने वाले।।
।। विक्रम ।।
सच की बुनियाद पर झूठ का व्यापार है।
सम्हल कर चलना जरा ये मेरे शहर का बाजार है।
।। विक्रम ।।
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तुम्हारे आसुओं की स्याही से हर बात लिखूंगा।
जैसे भी है हालात उन्हें दिन रात लिखूंगा।
।।विक्रम।।
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बच्चादानी निकल जाए तो भी शोर नहीं चलता।
ये जिला चिकित्सालय है यारो किसी का जोर नहीं चलता।
।। विक्रम ।।
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अख़बारों में शोर है जिम्मेदार चोर है।
हादसों के शहर में उम्मीदों का दौर है।।
।। विक्रम ।।
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बदनसीबी पर रोज आंसु बहा रहे हैं।
मैंने देखा है बच्चे स्कूल की जगह काल के गाल में समा रहे हैं।
।। विक्रम ।।
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नशा विरोधी अभियानों को कागज में मत रुकने दो।
मौत कर रही तांडव देखो कदम अभी ना थकने दो ।
सत्ता के राजस्व ना देखो
जनता को भी कहने दो।
बहुत कह चुका अब तक विक्रम ,अभय क्रांति ना थमने दो।।
।। विक्रम ।।
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Newslive88: 
एकदिन मेरी मौत का तमाशा बनेगा।
लिखा है अब तक जो अफसाना बनेगा।
।। विक्रम ।।
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अभय जान कर दुनिया को अब ।
जनता को मत डरने दो।।
कौन लड़ेगा हक की लड़ाई।
अभियानों को ना थमने दो।।
।। विक्रम ।।
इस क़दर खामोशियां महसूस हो रही है।
विकास चल रहा है या जनता सो रही है।
।। विक्रम ।।
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सब यहां धनवानों के करीबी हैं।
तुम्हे अहसास नहीं है भारत में
कितनी गरीबी है।
।। विक्रम।।
Newslive88
आंखों में धुआं सीने में जलन महसूस होती है।
ना जाने क्यूं लफ्जों में घुटन महसूस होती है।
।। विक्रम।।
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सत्ता के गलियारे में सच कि बोली लगती है, ना जाने क्यूं
तमाम उलझनें खामोश लगती है।
देश के विकास को आंखे तरस रही है।
किसान के जिस्म पर अब तो लाठियां बरस रही है।
।।विक्रम।।
ऐसा लगता है इन्कलाब आएगा।
भ्रष्टाचार खत्म होगा इक बदलाव आएगा।
।। विक्रम।।
जनता की तो ऐसी तैसी सत्ता का गुणगान किया।
कलम बेचकर भाटों ने बस अपना ही नाम किया।
।। विक्रम ।।
Newslive88.:
जनताकी तो ऐसी तैसी बस अपना गुणगान किया।
कलम बेचकर भाटों ने बस अपना ही नाम किया।
।। विक्रम ।।
Newslive88.:
तस्वीरोंके अंबारों में खेल यहां पर रचते हो।चाटुकारिता की स्याही से नाम फरेब के रचते हो।
।। विक्रम ।।Newslive88.:
ए मेरी कलम तुम बिकना नहीं।
चापलूसी और फरेब लिखना नहीं ।
।। विक्रम ।।
विकास की वाहवाही से दूर सच और भी है।
नजर उठाकर देखो आम जनता के दर्द और भी है।
।। विक्रम ।।
Newslive88
हालात बद्तर है शहर के यह माना मैंने।
सियासतों के खेल को अब जाना मैंने।
।। विक्रम ।।
तमाम खामोशियों में राज गहरे हैं।
सम्हल कर रहना यहां हर कदम पर पहरे हैं।
।। विक्रम।।
मेरे हालात पर रहम खाने वालों।
ऐसे तो दिल ना दुखाओ मुझे चाहने वालों।
।। विक्रम ।।
मेरे अल्फ़ाज़ दिल से मिटा देना ।
की अब मुझको मर जाने की दुआ देना।
।। विक्रम ।।
तुम्हारे दर्द मैंने आंखो में देखे थे।
लोग समझ बैठे की हम ख्वाब में हैं।
।। विक्रम ।।
सितारों की महफिल सजी है अब भी।
लेकिन अब हम शरीक नहीं होते।
।। विक्रम ।।
गुज़र जाने दो इन यादों के तूफानों को।
ना जाने क्या खो चुका हूं इन तूफानों में।
।। विक्रम ।।
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जानता हूं आज कल तुम परेशान रहते हो लेकिन आज भी बेपरवाह मैं भी नहीं 
जानता हूं तुम खामोश रहते हो
मगर महफिलों में मै भी नहीं
जानता हूं तुम रातों को जागा करते हो बरसों से सोया तो मै भी नहीं


  जानता हूं तुम चुपके चुपके रोते हो तुम्हारे बिना मुस्कुराया तो मै भी नहीं।
।। विक्रम ।।
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कभी नफरत तो कभी मोहब्बत का हिस्सा हूं।
मैं चंद अल्फाज का एक छोटा सा किस्सा हूं।।
।। विक्रम ।।
Newslive88
आजकल कलम भी लफ्जों से बेवफ़ाई करती है।
छुपाकर दर्द स्याही में मुस्कुराहट बयान करती है।
।। विक्रम ।।
कभी पत्थर कभी देवता कहां ऐसे अरमान है ।
मेरी परछाई है मेरे लफ्ज़ बस यही मेरी पहचान है।
।। विक्रम ।।
ना जाने कितनी बातें की हैं तन्हाइयों से मैंने,
और तुमने समझा मैंने लिखना छोड़ दिया।
हालात से समझौते या नीलामी का हिस्सा,
कलम का मेरी इनसे रिश्ता ही तोड़ दिया।
और तुमने समझा मैंने लिखना ही छोड़ दिया।
अश्क आंखों के छुपाकर मुस्कुराता हूं अक्सर ,
अपनी उम्मीदों से मैंने मुंह मोड़ लिया।
और तुमने समझा मैंने लिखना ही छोड़ दिया।
।। विक्रम ।।
मेरी आंखों पर भी अब काली पट्टी बांध दो।
की अब मुझको भी तबाही के मंजर अच्छे नहीं लगते।
।। विक्रम ।।
मैंने अब तक जमीन ओ आसमां को कभी परेशां नहीं देखा।
दरिया और पहाड़ों को हिन्दू या मुसलमान नहीं देखा।
।। विक्रम ।।
सत्ता की बातें में सच कहां दिखता है।
दो रोटी के लिए भी यहां जिस्म बिकता है।।
।। विक्रम ।।
रात मैंने उलझनों से मैंने पूछा , तुम सुलझती क्यो नहीं।
खामोशी के साथ मुस्कुरा कर बोली , तेरे लफ्जों का वजूद ही हमारी उलझनों में है।
।। विक्रम ।।
महसूस होता है कि अब जान बाकी नहीं ।बहुत खूबसूरत है दुनिया लेकिन अरमान बाकी नहीं।।
।। विक्रम ।।
मौत से पहले मौत का इंतजार कौन करे।
ए जिंदगी तेरा ऐतबार अब कौन करे।
।। विक्रम ।।
अपनी चिता को आग लगाकर जिंदा हूं।
जिंदगी तेरे हर सवाल से शर्मिंदा हूं।।
।। विक्रम ।।
आज खुशियों से मुंह मोड़ आया हूं।
मैं खुद को ही तन्हा छोड़ आया हूं।
।। विक्रम ।।
आस्तिनों में खंजर छुपा कर रखने वालों।
मेरी मौत की तारीख तो बता दो मुझे।
।। विक्रम ।।
मेरे लफ्जों में मैंने दर्द छुपाकर रखें है।
मेरे अश्कों की कहानी अश्कों से लिखते लिखते।
।। विक्रम ।।
रोज शाम ढल जाती है उम्मीदों की शमा ।
ना जाने क्यूं अब बातों पर ऐतबार नहीं होता।
।। विक्रम ।।
भय और लोकलाज की वजह से नहीं की जाने वाली शिकायतों को भी शहर की शांति व्यवस्था ही माना जाए।
।। विक्रम ।।
कभीसोएंगे हम भी कफ़न ओढ़कर।आज तो तन्हाइयों से फुर्सत ही नहीं मिलती।
वो और होंगे जिन्हें मिलती होगी खुशी।
हमें तो जीने के लिए जिंदगी भी नहीं मिलती।।
।। विक्रम ।।
सिलसिलोंका टूटना भी जरूरी है।
जो मिले है तो बिछड़ना भी जरूरी है।।
दर्द की दास्तां लिखना जो चाहा कभी।
अश्कों का पलकों पर बिखरना जरूरी है।
।। विक्रम ।।
जो दर्द दे सको तो हंसकर कबूल है।
मेरी जिंदगी का यहीं उसूल है।
।। विक्रम ।।
मुस्कुराने की दुआ भी अब बद्दुआ लगती है।चलो सफर पर विक्रम तन्हा जिंदगी भी बेवफा लगती है।।
।। विक्रम ।।
क्यूंतडपाती है ए जिंदगी तू भी।
कहीं तू भी मेरी दोस्त तो नहीं।।
।। विक्रम ।।
चलोअपने ही हाथों से जिंदगी की शाम कर लें।
अपनी खुशियों को आज खुद ही तमाम कर लें।।
मौत का क्या है आती है तो आ जाए।
अब दर्द के लम्हों को भी विक्रम के नाम कर लें।।
।। विक्रम ।।
गुजरे वक़्त की मानिंद लौटकर ना आएंगे।
मेरे इस दौर के बाकी यही निशां होंगे।।
।। विक्रम ।।
[02/03 11:42 pm] Newslive88.: अक्सर सुनसान रास्तों पर चलने लगा हूं।
वो कहते हैं अब मै बदलने लगा हूं।
।। विक्रम ।।
[02/03 11:54 pm] Newslive88.: आज हम भी जिंदगी को सताते हैं,चलो कफ़न ओढ़ कर सो जाते हैं।
अक्सर तुम नाराज होते हो हमसे,चलो आज हम भी तुमसे नाराज हो जाते है।
।। विक्रम ।।
[03/03 12:07 am] Newslive88.: धोखा खा जाते हैं अक्सर चेहरा देखने वाले।
मेरे दर्द का सागर तो मेरी आखों में बहता है।
।। विक्रम ।।
[03/03 12:53 am] Newslive88.: यादों के दर्द समेटे चंद अल्फाज लिखता हूं।
शायरी नहीं दिल के जज़्बात लिखता हूं।
।। विक्रम ।।
[03/03 8:57 am] Newslive88.: तन्हाइयां , दर्द और रंज हमारे साथ रहने दो।
अब खुशियों की अमानत हमसे सम्हाली नहीं जाती।।
।। विक्रम ।।
आज हम अपने अरमानों से मुंह मोड़ लेते हैं।
उनकी खुशी की खातिर खामोशी ओढ़ लेते है।।
।। विक्रम।।
मेरे हौसले की दाद दो मुझको।
किसी को पाकर खोना आसान कहां होता है।
।।विक्रम।।
[04/03 1:43 pm] Newslive88.: तकलीफें ऐसे भी बयां होती हैं।
आंखे नम और खमोश जुबां होती है।
।। विक्रम ।।
[04/03 11:26 pm] Newslive88.: हवा का झोंका हूं पल दो पल में गुजर जाऊंगा।
पढ लो चंद अल्फाज मेरे ना जाने कब बिछड़ जाऊंगा।।
।। विक्रम ।।
[04/03 11:39 pm] Newslive88.: दर्द में डूबे अल्फाज पर गौर करने वाले।
तू भी रोएगा कभी मुझको रुलाने वाले।
।। विक्रम ।।
[04/03 11:55 pm] Newslive88.: और कितना तराशेगा ए वक़्त मुझे ।
इतना आसान नहीं इन्सान का खुदा हो जाना।
।। विक्रम ।।
[05/03 12:04 am] Newslive88.: क्यूं हो उदास इस तरह उम्मीदें भी अधूरी छोड़ जाएंगे।
आवाज लाख भी दोगे तो सांसे अपनी तोड़ जाएंगे।।
।। विक्रम ।।
जाओ अब नहीं लिखेंगे दर्द अपने।
तेरे खातिर कलम भी तोड़ आए है।
टूटती सांसों से भी फर्क नहीं पड़ता।
जिंदगी में ऐसे भी कुछ मकाम आए है।
।। विक्रम ।।
किससे उम्मीद करें इस जहां में ए दोस्त।
यहां तो कांधा भी तुम मरने के बाद दिया करते हो।
।। विक्रम ।।
[08/03 12:01 am] Newslive88.:
चंदटूटे अरमानों के टुकड़े उठाने की कोशिशें की थी।
हाथो की उंगलियां यूं ही लहूलुहान नहीं होती।
।। विक्रम ।।
[08/03 12:32 am] Newslive88.:
मेरी सलामती की दुआ जो किया करते थे कभी।
सुना है आज वे ही मेरे वास्ते खंजर खरीदते हैं।
।। विक्रम ।।
[08/03 1:28 am] Newslive88.:
वक़्तके साथ लोगों के जज़्बात बदलते देखे है।
गर्दिश के दौर में अक्सर खयालात बदलते देखे हैं।
उम्मीद क्या कीजिएगा किसी और से यहां।
मजबूरीयों के नाम पर ताल्लुकात बदलते देखे है।
।। विक्रम ।।
[08/03 2:04 am] Newslive88.:
शामवो मेरी आंखो में नमी देखकर बोले।
इतना दर्द सहने से विक्रम मर जाओ तो बेहतर है।
।। विक्रम ।।
[08/03 10:17 am] Newslive88.: मजबुर थे तो प्यार ही नहीं करना था।
तुम्हारे नाम पर कोई जीता मरता है।।
महफिलों की रौनक मुबारक हो तुम्हे।
तन्हाइयों में भी तुम्हे याद किया करता है।
[08/03 10:24 am] Newslive88.: तमाम तस्वीरें बेजान सी लगती हैं।
तेरे दो आसुओं की कशिश में डूबकर देखा।
।। विक्रम ।।
[08/03 10:28 am] Newslive88.: लिखते लिखते उम्र तमाम हो जाएगी।
कुछ इस तरह जिंदगी की शाम हो जाएगी।
।। विक्रम ।।
मेरी बर्बादियों में कौन शामिल है आखिर।
मेरे अपने ही मेरे राजदार है यारों।।
।। विक्रम।
अश्क बनकर स्याही हर अल्फ़ाज़ में उतर जाते हैं।
मेरे इस दर्द की तासीर ही कुछ ऐसी है।
।। विक्रम ।।
[11/03 1:31 pm] Newslive88.: बख्श दो मुझको अब गमो की दौलत ।
दर्द के बगैर जिंदगी बे मजा लगती है।
।। विक्रम ।।
[11/03 1:33 pm] Newslive88.: दर्द के बगैर जीना कैसा।
यही तो तुम्हारी इनायतें है।
।। विक्रम।।
[11/03 3:10 pm] Newslive88.: खरीददार और भी है इस शहर में।
मेरी कीमत ना लगाओ यारों।
।। विक्रम ।।
गौर से देखो इस लाश को यह भी इक इंसान था।
मरने के पहले तक हिन्दू और मुसलमान था।
सिक्कों के खातिर सरहदों में बाट दिया है सबको।
चन्द सिक्कों में बिक गया वो कैसा ईमान था।
।। विक्रम।।
कब तक झूठी बात करोगे।
कब तक हमें बहलाओगे।।
कैसे होगा विकास देश का।
जब भ्रष्टाचार मिटा ना पाओगे।
देखो हश्र सच का विक्रम।
झूठ से लड़ते जाओगे।
अंधे बहरों की नगरी में।
शीशा किसे दिखाओगे।
@ विक्रम @
Newslive88
ए मेरी कलम तुम क्यूं बयां करती हो दर्द।
उन्हें दर्द को दर्द लिखने से तकलीफ पहुंचती है।
Newslive88
@ विक्रम सिंह राजपूत @
बिकती रही शराफत सरे बाज़ार।
कुछ इस तरह हमारी नीलामी की गई।
Newslive88
@ विक्रम सिंह राजपूत @
दंगो की आग में क्या खोया क्या पाया है।
आंसु पोछकर देखा तो बस इंसान गवाया है
Newslive88
।। विक्रम सिंह राजपूत ।।
कहीं आंसु कहीं आहें कहीं बलात्कार बिकता है।
सुना है हर सुबह यहां झूठ का संसार बिकता है।
Newslive88
।। विक्रम सिंह राजपूत ।।





Vikram Singh Rajput Vikram Singh Rajput Vikram Singh Rajput Vikram Singh Rajput Vikram Singh Rajput
मन करता है कि कलम को तोड़ दूं।
हालत ऐसे मत बनाओ की लिखना ही छोड़ दूं।
।। विक्रम।।
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सच की बुनियाद पर झूठ का व्यापार है।
सम्हल कर चलना जरा ये मेरे शहर का बाजार है।
।। विक्रम ।।
Newslive88
तुम्हारे आसुओं की स्याही से हर बात लिखूंगा।
जैसे भी है हालात उन्हें दिन रात लिखूंगा।
।।विक्रम।।
Newslive88
बच्चादानी निकल जाए तो भी शोर नहीं चलता।
ये जिला चिकित्सालय है यारो किसी का जोर नहीं चलता।
।। विक्रम ।।
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अख़बारों में शोर है जिम्मेदार चोर है।
हादसों के शहर में उम्मीदों का दौर है।।
।। विक्रम ।।
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बदनसीबी पर रोज आंसु बहा रहे हैं।
मैंने देखा है बच्चे स्कूल की जगह काल के गाल में समा रहे हैं।
।। विक्रम ।।
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नशा विरोधी अभियानों को कागज में मत रुकने दो।
मौत कर रही तांडव देखो कदम अभी ना थकने दो ।
सत्ता के राजस्व ना देखो
जनता को भी कहने दो।
बहुत कह चुका अब तक विक्रम ,अभय क्रांति ना थमने दो।।
।। विक्रम ।।
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एकदिन मेरी मौत का तमाशा बनेगा।
लिखा है अब तक जो अफसाना बनेगा।
।। विक्रम ।।
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अभय जान कर दुनिया को अब ।
जनता को मत डरने दो।।
कौन लड़ेगा हक की लड़ाई।
अभियानों को ना थमने दो।।
।। विक्रम ।।
इस क़दर खामोशियां महसूस हो रही है।
विकास चल रहा है या जनता सो रही है।
।। विक्रम ।।
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सब यहां धनवानों के करीबी हैं।
तुम्हे अहसास नहीं है भारत में
कितनी गरीबी है।
।। विक्रम।।
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ग्राम चिनकी उमरिया मार्ग पर मुनाफे के लालच में यात्रियों की जान से खिलवाड़।।


नरसिंहपुर।
ग्राम चीनकी उमरिया जाने वाले वाहनों में भेड़ बकरियों की तरह सवारियों को भरा जाता है कम समय और अधिक मुनाफे के लालच में यात्रियों की जान से खिलवाड़ किया जा रहा है,परन्तु प्रशासन किसी अनहोनी के बाद कार्यवाही का इंतजार कर रहा है। भीड़ भाड़ में लड़कियों और महिलाओं को खासी परेशानियों का सामना करना पड़ता है,ऐसे हालात में यौन शौषण का शिकार होने पर भी कुछ नहीं किया जाता है क्योकि भीड़ होने का फायदा भेड़ियों द्वारा उठाया जाता है।
डेडवारा विस्थापितों की अनदेखी करता  प्रशासन ।

डेडवारा विस्थापितों की अनदेखी करता प्रशासन ।


नरसिंहपुर।
ग्राम डेडवारा के विस्थापितों को शायद प्रशासन भुला चुका है।सड़क बिजली पानी जैसे मूलभूत सुविधाओं की पूर्ति  करना भी शासन को गंवारा नहीं है। शमशान घाट स्थित पानी की टंकी पर लगे मीटर से १५० घर तार खींचकर बिजली की जरूरत को पूरा करते हैं,पेयजल के लिए एक नल की व्यवस्था कर दी गई है परन्तु लगभग तीन सौ लोग एक ही नल से पानी भरते हैं और अक्सर ऐसी परिस्थिति में विवाद की स्थिति बन जाती है।शासन द्वारा दी गई जगह भी अपर्याप्त नजर आती है, एक परिवार गुजर बसर कर सके इतनी जगह भी शासन द्वारा प्रदान नहीं की गई।
आवास योजनन्तर्गत कुछ मकानों का निर्माण कार्य चल रहा है हितग्राही को समय पर भुगतान नहीं होने पर सूदखोरों से कर्ज लेकर निर्माण करवाया जा रहा है उस पर भी प्रशासन चालीस हजार रुपए की किश्त घटाकर पच्चीस हजार रुपए हितग्राही को दे रहा है। अधिकारियों और छुट भैये नेताओं से बातचीत के बाद भी आश्वासन के अलावा कुछ नहीं मिलता है, देखना यह है कि क्या इन बस्तियों की खबर सिर्फ चुनाव के दौरान ही ली जाएगी।

मध्य प्रदेश स्थापना दिवस समारोह केवल सरकारी आदेश बन कर रह गया है।



नरसिंहपुर।
१ नवंबर को मध्य प्रदेश स्थापना दिवस समारोह आयोजित करने के लिए शासन द्वारा जारी निर्देश मात्र कागजी कार्यवाही में सिमट कर रह गए हैं।जिले के समीपवर्ती ग्राम समनापुर प्रा शाला,राम पिपरिया प्रा शाला,ग्राम नंदवारा प्रा शाला एवम् आंगनबाड़ी केंद्र पर ना ध्वजा रोहण किया गया और ना राष्ट्र गान गाया गया यहां तक कि मध्य प्रदेश स्थापना दिवस समारोह के अवसर पर मध्य प्रदेश गान भी नहीं गाया गया।कुछ ग्रामीण क्षेत्रों में केवल कागजों पर मध्य प्रदेश स्थापना दिवस का आयोजन किया गया।
संत कबीर पोस्ट मैट्रिक छात्रावास अधीक्षक और अधिकारियों का छात्रों के साथ दुर्व्यवहार।

संत कबीर पोस्ट मैट्रिक छात्रावास अधीक्षक और अधिकारियों का छात्रों के साथ दुर्व्यवहार।


नरसिंहपुर।
संत कबीर पोस्ट मैट्रिक छात्रावास अधीक्षक और अधिकारियों के उपेक्षात्मक रवैए से छात्रावास में रहने वाले छात्रों का भविष्य संकट में पड़ गया है। अधिकारियों की मिलीभगत और लापरवाहियों का खामियाजा छात्रों को भुगतना पड़ रहा है, योजनाबद्ध तरीके से छात्रों को अधीक्षक का कोप भाजन बनना पड़ रहा है।अधीक्षक बच्चों के अध्ययन में बाधा डालकर छात्रों के भविष्य से गंभीर खिलवाड़ कर रहे हैं।निर्दोष छात्रों की शिकायत भी अधीक्षक की अधिकारियों के साथ मिलीभगत के कारण नहीं सुनी जा रही है।बच्चों के भोजन का निवाला छीन कर भी उनकी शिकायतों को अनसुना किया जा रहा है, ह्यदयहीन अधिकारी शिकायत के बावजूद कुछ भी सुनने को तैयार नहीं, छात्रों द्वारा यह बताने के बाद भी कि भोजन उन्हें बनाना पड़ रहा है आराम कक्ष में बैठे अधिकारी मानने को तैयार नहीं बल्कि पलटकर छात्रावास अधीक्षक की पैरवी कर रहे हैं कि भोजन बनाने के लिए कर्मचारी लगा है भ्रष्ट अधिकारियों और अधीक्षक को यह अहसास नहीं की जनता अब जाग चुकी है। 

आगामी चुनाव का बहिष्कार करेंगे ग्राम कंधरापुर के निवासी।




आस पास।
वर्षों से उपेक्षा का दंश झेल रहे कंधरापुर ग्राम वासियों ने सर्व सम्मति से निर्णय लिया है कि यदि मुशरान पिपरिया से कंधरापुर तक सड़क निर्माण कार्य नहीं किया गया तो ग्राम वासियों द्वारा किसी भी पार्टी को वोट नहीं देंगे।गांव की स्थिति अति दयनीय है सरपंच द्वारा लापरवाही के चलते विकास कार्यों की ओर ध्यान नहीं दिया जाता है परेशान ग्रामीण अपनी व्यथा से प्रशासन को कई बार अवगत करा चुके हैं परन्तु हालत आज भी बद्तर है।

सरदार वल्लभ भाई पटेल के जन्मोत्सव पर रन फॉर यूनिटी का आयोजन ।


नरसिंहपुर।
माननीय विधायक महोदय के सानिध्य में रन फॉर यूनिटी का आयोजन किया गया,जिसमें बच्चों के साथ नागरिकों ने भी उत्साह पूर्वक अपना योगदान प्रदान किया। विधायक महोदय द्वारा रैली में बच्चों का उत्साह वर्धन  कर समाज को एक नई दिशा देने का संदेश प्रदान किया। 

ग्राम बेदू में अव्यवस्थाएं चरम पर


आस पास।
ग्राम बेदू में सफाई अभियान की धज्जियां उड़ाई जा रही है,जगह जगह कचरे के ढेर लगे है, बेदू स्थित विद्यालय के चारों ओर सुरक्षा हेतु बाउंड्री वॉल या फेंसिंग उपलब्ध नहीं है छात्राएं को असुरक्षित माहौल में खेल परिसर का उपयोग करना पड़ता है।पशु औषधालय के सामने कचरे का ढेर कुछ इस तरह लगा है कि औषधालय भवन तक जाना संभव प्रतीत नहीं होता।गांव में जगह जगह कचरे के ढेर लगे हैं परन्तु सरपंच कि कुंभकर्णी निंद्रा भंग नहीं हो रही है।ग्रामीणों के अनुसार सरपंच के कृपा पात्रों को तो योजनाओं का लाभ दिया जाता है परन्तु ग्रामीणों को अनेक तरह से परेशान किया जाता है।

सुरवारी के स्कूल में बाहर बैठ कर अध्ययन करने को मजबुर बच्चे।




आस पास।
ग्राम सुरवारी के विद्यालय में मूलभूत सुविधाओं के अभाव के कारण बच्चों को बाहर बैठकर अध्ययन करना पड़ रहा है, कक्षाओं में पंखे नहीं होने से शिक्षक बच्चों के साथ बाहर बरामदे में अध्यापन का कार्य कर रहे हैं। बच्चों को बाहर फर्श पर बैठना पड़ता है। शिक्षिकाओं का कहना था कि प्रशासन को समस्याओं से अवगत कराया गया परन्तु आज तक कोई भी कार्यवाही नहीं की गई।

ग्राम बहोरीपार आंगनबाड़ी केंद्र में धांधली।




आस पास।
जिले के समीपवर्ती क्षेत्र बहोरीपार में संचालित आंगनबाड़ी केंद्र की संचालिका एवम् सहायिका द्वारा कर्तव्य का पालन नहीं किया जा रहा है, बच्चों को ठंडे फर्श पर बैठाकर भोजन वितरण किया जाता है सहायिका के अनुसार केंद्र में ४५ बच्चे हैं(कक्ष में भोजन के समय मात्र बारह बच्चे उपस्थित थे।) परन्तु ग्लास चार ही उपलब्ध है बच्चे हैंडपंप चलाकर पानी पीते हैं ,अक्सर इस धक्का मुक्की में बच्चे गिरकर घायल हो जाते हैं। हैरानी हुई जानकर कि गांव में एक भी कुपोषित बच्चा नहीं है परन्तु तभी अचानक सहायिका द्वारा बताया गया कि गांव में एक कुपोषित बच्चा है जिसकी उम्र मात्र पांच माह है।ग्राम वासियों द्वारा चर्चा के दौरान बताया गया कि केंद्र संचालिका एवम् सहायिका द्वारा बच्चों के साथ भेदभाव किया जाता हैं,बच्चे डर के कारण आंगनबाड़ी केंद्र नहीं जाते हैं यही वजह है कि केंद्र में बच्चे कम ही दिखाई देते हैं।शासन का रवैया भी केंद्रों के साथ उपेक्षात्मक है तीन चार माह में एक बार खाद्य सामग्री भेजी जाती है वह भी पर्याप्त प्रदान नहीं की जाती है।शासन की योजनाओं का बंटाधार करने में बहोरीपार आंगनबाड़ी केंद्र भी किसी से कम नहीं है।
नरसिंहपुर गैर लाइसेंसी सूदखोरों पर शासन की सख्ती।

नरसिंहपुर गैर लाइसेंसी सूदखोरों पर शासन की सख्ती।

नरसिंहपुर।
चेक रखकर कर्ज देने का अवैध धंधा नगर में पांव पसार चुका है इसके कारण लोगों को अपनी जान तक गवानी पड़ी है परन्तु अधिकारियों की मिलीभगत के चलते किसी भी प्रकार की कोई कार्यवाही गैर लाइसेंसी सूदखोर साहूकार के विरुद्ध नहीं होने से शासन द्वारा सख्ती बरती जा रही है। मध्य प्रदेश साहूकार अधिनियम १९३४ के प्रावधान के अनुसार सभी गैर लाइसेंसी कर्ज शून्य समझे जाएंगे।
कानून में यह प्रावधान है।
१- ब्याज का कारोबार करने वालों के अकाउंट का पंजीयन अनुविभागीय अधिकारी द्वारा निर्धारित प्रपत्र पर किया जाएगा।
२- देनदार द्वारा दी गई राशि का पूर्ण विवरण दर्ज किया जाना चाहिए।
३- ब्याज का कारोबार करने वालों को कर्जदार का चेकबुक या एटीएम रखने का अधिकार नहीं होगा।
४-सूद का कारोबार करने वाले बिना कर्जदार की अनुमति के खाते से पैसे नहीं निकाल सकते हैं।
लोक सेवा आयोग द्वारा सचिव को आदेश दिए गए हैं कि सूदखोरों की शिकायत के लिए हेलपलाइन नंबर जारी किए जाएं।
लोक आयोग ने भारतीय रिजर्व बैंक के आदेश की प्रति भी प्रेषित की कि है जिसमें सूदखोरों से प्रताड़ित व्यक्तियों को पूरी रकम वापस दिलाने का प्रावधान है।
बेदु उमरिया तथा अन्य ग्राम पंचायत के कार्यों में सरपंच द्वारा की जा रही मनमानी

बेदु उमरिया तथा अन्य ग्राम पंचायत के कार्यों में सरपंच द्वारा की जा रही मनमानी


नरसिंहपुर।
जिले के समीपवर्ती ग्रामीण क्षेत्रों से लगातार शिकायत की सामने आ रही है कि पंचायत की कार्यप्रणाली संतोष जनक नहीं है, सरपंच के कृपा पात्रों को तो सभी योजनाओं के लाभ आसानी से प्राप्त हो जाता है परन्तु ग्रामीणों को कागजी कार्यवाही के फेर में उलझाकर परेशान किया जाता है भय ग्रस्त ग्रामीणों का कहना है कि हम शिकायत करें भी तो कैसे सरपंच अपनी पहुंच के कारण हमेशा झूठी रिपोर्ट प्रस्तुत कर बच जाते हैं और उसके बाद ग्रामीणों को समस्याओं का सामना करना पड़ता है। जेबें गर्म करने पर अपात्रों को योजनाओं का लाभ दिलवाने में सरपंच अपना विशेष योगदान प्रदान करते हैं। झोलाछाप फर्जी डॉक्टर भी सरपंचों की कृपा से अपनी दुकान ग्रामीण क्षेत्रों में चला रहे हैं किसी भी सरपंच द्वारा अपने पंचायत क्षेत्र में कभी भी किसी डॉक्टर के विरुद्ध कोई जांच या शिकायत दर्ज नहीं की गई। ग्राम बेदु,करकबेल,बरहेटा,सुरवारी, घाट पिंडरई,उमरिया,बेलखेड़ा की दयनीय हालत देखकर आसानी से अंदाजा लगा सकते हैं कि गांव में सरकारी योजनाओं को किस तरह पलीता लगाया जा रहा है।आंगनबाड़ी केंद्र,स्वास्थ्य केंद्र, प्राथमिक विद्यालयों का स्तर मध्याह्न भोजन योजना में गड़बड़ी कर शासन को लाखों रुपए का चूना लगाया जा रहा है।

प्रदेश अध्यक्ष अभिलाष पांडे जी के 1 वर्ष सफलता पूर्वक पूर्ण।




नरसिंहपुर।
युवा मोर्चा के ऊर्जावान प्रदेश अध्यक्ष अभिलाष पांडे जी के 1 वर्ष सफलता पूर्वक पूर्ण होने पर युवा मोर्चा पश्चिम मंडल नरसिंहपुर ने शहीदों को याद कर श्रद्धांजलि अर्पित की एवम् शहीदों की याद में गांधी चौक पर  दीप प्रज्वलित किए गए, व भा.ज.पा के  वरिष्ठ कार्य कर्ताओ को सम्मानित किया गया। नरसिंहपुर जिले के लोकप्रिय विधायक श्री जालम सिंह पटेल जी,मंडल अध्यक्ष मेर सिंह गुमास्ता जी, मंडल युवा मोर्चा अध्यक्ष प्रदीप पटेल जी ने मंडल के वरिष्ठ भाजपाईयो का सम्मान किया पोहोप सिंह पटेल जी.जगदीश पटेल जी, रॉ दशरत सिंह पटेल जी,शशि महाराज जी ,दीपक दुबे जी, सम्मान किया एवं उनसे आशिर्वाद प्राप्त किया। उक्त कार्यक्रम में  विधायक जी ने युवाओ का मार्गदर्शन किया युवा मोर्चा के कैलाश पटेल,अजय पटेल,लखन गुमास्ता,भूपेंद्र पटेल, नीलेश पटेल,अंकित अग्रवाल,सचिन पटेल,पिंटू मेहरा,हर्शल नेमा,हिमांशु साहू,दिलीप पटेल,राजेश पटेल,जीतेन्द्र महाराज,सतेंद्र पटेल,रोहित अग्रवाल,,महेंद्र पटेल,ऋषि मेहरा,गनपत मलाह,नेतराम मलाह,शुवम् पटेल,देबेन्द्र पटेल,संदीप पटेल,सिलेश चढ़ार, एंव आदि युवा मोर्चा के साथी मौजूद थे।

बेलखेडी शेड नदी के पुल से कूदकर लड़की ने की आत्महत्या ।




बेलखेडी।
जिले के समीवर्ती ग्राम बेलखेदी में स्थित शेड नदी के पुल से कूदकर जान दे दी।लड़की के परिजनों का पता नहीं चल पाया है।आखिर कौन सी परिस्थितियों में लड़की द्वारा इतना घातक कदम उठाया गया यह जान चर्चा का विषय बना रहा।

नर्सिंग होम एक्ट का निडरता से उल्लघंन नरसिंहपुर।


नरसिंहपुर।
जिले में संचालित निजी क्लीनिक पर अनेक तरह की अनियमितताओं के बावजूद किसी भी तरह की कोई भी कार्यवाही ना होना अपने आप में ही कई संदेहास्पद सवाल खड़े करता है।जनता के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है परन्तु बगैर किसी हादसे के शासन की निंद्रा भंग नहीं होती।क्लीनिक की जांच की महज ओपचारिकता निभाने से कुछ फर्जी डॉक्टर भी स्थिति का लाभ उठा रहे हैं, जनता के हितों को ध्यान में रखते हुए प्रशासन गंभीर कदम उठाए अन्यथा भारत के अंतिम पंक्ति के व्यक्ति तक न्याय का सपना अधूरा ही रह जाएगा।

अफसरशाही के आगे मौन प्रशासन ,नरसिंहपुर।






नरसिंहपुर।
जिले में तमाम तरह की योजनाओं के क्रियान्वयन के बाद भी अनेक तरह की समस्याओं और शिकायतों का सिलसिला आज भी जारी है स्वछता अभियान के बावजूद सड़कों पर कचरे के ढेर दिखाई देते हैं, मध्याह्न भोजन योजना में तमाम तरह की गड़बड़ियां, बच्चों को भोजन के बाद बर्तन साफ करने के लिए बाध्य करना,किसी  भी विभाग में शिकायतों का निराकरण ना हो पाना, स्वास्थ्य सुविधाओं के साथ खिलवाड़ किया जाना,शिकायत करने पर अप्रत्यक्ष रूप से धमकाना शहर की हक़ीक़त को बयां करते हैं।आम जनता सदा ही शासन से आस लगाए रखती है परन्तु प्रशासन की उदारता के कारण आम जन अपने को ठगा सा महसूस करते हैं।

बड़गवा सात लाख रुपए शासन से सेंक्शन और आंगनबाड़ी केंद्र की दुर्दशा।


बड़गावा।
जर्जर भवन में संचालित आंगनबाड़ी केंद्र कभी भी दुर्घटना का शिकार हो सकता है संचालिका श्रीमती पटेल के अनुसार ग्राम पंचायत में सात लाख रुपए सेंक्शन शासन द्वारा लगभग तीन माह पूर्व किए जा चुके हैं परन्तु पंचायत के पास फंड नहीं होने के कारण कार्य प्रारंभ नहीं हो सका है भवन कभी भी भरभरा कर गिर सकता है।हालत देखकर आश्चर्य होता है कि दो कुपोषित बच्चों को जिला चिकित्सालय में उपचार के बाद भी बच्चों का वजन एक किलो तक कम हो गया क्यों की शासन द्वारा बच्चों को भेजी गई सामग्री सुपरवाइजर द्वारा समय पर नहीं प्रदान की जाती है।

बच्चों को प्राप्त हो रहा गुणवत्ता हीन भोजन।




आस पास।

शासन द्वारा चलाई जा रही तमाम योजनाओं के बाद भी आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चो को गुणवत्ताहीन सामग्री का वितरण किया जा रहा है।चाहे बोर्ड पर भोजन का मेन्यू कुछ भी हो परन्तु बच्चों को आलू की सब्जी और रोटी दी जाती है, खीर के नाम पर चावल में शक्कर और नाममात्र दूध डालकर दे दिया जाता है,बहाना भी सुपरवाइजर का आपको सोचने पर मजबुर कर देगा कि दूध उपलब्ध नहीं हो सका।क्या दूध की व्यवस्था भी सुपरवाइजर कर नहीं पाते है या जेब गर्म करने के फेर में लापरवाही बरती जाती है।हालात यह हैं कि पालक स्वयं बच्चों को केंद्र भेजने से डरते हैं।केंद्र संचालिका बच्चों से उचित व्यवहार नहीं करती है, जातिगत भेद भाव किया जाता है, बच्चों को प्रदान सुविधाओं का लाभ सुपरवाइजर और उसके कृपा पात्रों को ही प्राप्त होता है।आंगनबाड़ी संचालिका के अनुसार सुपरवाइजर केंद्र पर सामग्री भेजने में भेदभाव करते हैं कई बार तो आवश्यकता से भी कम सामग्री भेज दी जाती है।
बच्चे होने की दवा का दावा करने वाले लुटेरे।

बच्चे होने की दवा का दावा करने वाले लुटेरे।



नरसिंहपुर।
जिले में इस समय लोगों को मूर्ख बनाकर बच्चें होने की दवा का दावा करने वाले कुछ ठग शहर में घूम कर लोगो को मूर्ख बनाकर लूट को अंजाम दे रहे हैं।लूट है आयुर्वेद के नाम पर लूट है धर्म के नाम पर कृपया सावधानी और विवेक से काम ले।

मानवता हुई शर्मसार नरसिंहपुर रेलवे स्टेशन।




नरसिंहपुर।
शिक्षित होने के बाद भी मनुष्य कितना संवेदन हीन हो गया है इस घटना क्रम को ध्यानपूर्वक पढ़कर बहुत ही आसानी से समझा जा सकता है।
अमर कंटक एक्सप्रेस से नवजात शिशु रेल गेट से चंद मीटर दूर गिर जाता है स्थानीय लोगों के द्वारा 108 को कॉल कर बुलवाया गया तब 108 के चालक अनिल रजक ने नवजात शिशु को ऑक्सीजन देकर बच्चें की जान बचाई। नवजात की गम्भीर स्थिति को देखते हुए जबलपुर रेफर कर दिया गया है परन्तु इस संबंध में समाचार लिखने तक परिजनों द्वारा अब तक कोई खोज खबर नहीं की गई है।

शासन की उपेक्षा का शिकार प्राथमिक विद्यालय।

शासन की उपेक्षा का शिकार प्राथमिक विद्यालय।


नरसिंहपुर।
जिले के समीपवर्ती क्षेत्र ग्राम मगरधाऔर कारकबेल एवम् अन्य ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित प्राथमिक विद्यालय की दयनीय स्थिति देखकर आप अंदाजा नहीं लगा सकते कि गांव के इस विद्यालय में शौचालय की सुविधा भी उपलब्ध नहीं है।भवन का एक हिस्सा टूटकर गिर जाने के बाद प्रशासन को भवन की मरम्मत के लिए कई बार आवेदन दिए जाने के बाद भी ना तो शौचालय की व्यवस्था की गई और ना ही भवन की मरम्मत की ओर ध्यान देना आवश्यक माना गया विद्यालय में शिक्षिकाओं को भी शौचालय उपलब्ध नहीं होने के कारण समस्या का सामना करना पड़ रहा है।प्रा शाला के दो कक्षों में पांच कक्षाएं संचालित की जा रही है कक्षा में प्रकाश ओर हवा की उचित व्यवस्था नहीं है विद्यालय की तरफ से इस संबंध में कई बार आवेदन दिए जा चुके हैं परन्तु आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। मध्याह्न भोजन योजना के वितरण में भी अनियमितताएं बरती जा रही है भोजन की गुणवत्ता का स्तर , बच्चों से बर्तन साफ करवा कर उन्हें प्रताड़ित किया जा रहा है। बच्चों को प्रताड़ित करने के बाद भी समूह अपनी गलती मानने को तैयार नहीं होते क्योंकि लगातार शिकायत करने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं होने से समूह अपनी मनमानी पर उतारू है।

विज्ञापन के लिए नियमों की अनदेखी।



नरसिंहपुर।
जिले में अब तक अवैध होर्डिंग की घटनाएं अक्सर सुनने में आती हैं परन्तु नदी में विज्ञापन को अपना अधिकार समझने वाले विज्ञापनदाता को यह भी विचार नहीं आया कि इस प्रकार प्रचार करने के चक्कर में वाहन चालकों के दुर्घटना ग्रस्त होने का अंदेशा बना रहता है।आदिवासी बहुल इलाकों में कुपोषण पर ध्यान देने की अपेक्षा अशिक्षित वर्ग को अप्रत्यक्ष तौर पर भरपूर जवानी का मज़ा लेने के लिए दवाओं हेतु प्रेरित करने का विज्ञापन वह भी नियमों को ताक पर रखकर ,आखिर कहां तक उचित है।जिले में बहुत से स्थानों पर ऐसे विज्ञापन देखे जा सकते हैं जो की नियमों की धज्जियां उड़ाते हैं।

अवैध दोहन से छलनी होता नदियों का सीना और जल स्तर में गिरावट।।


नरसिंहपुर।
जिले की नदियों की स्थिति इतनी भयावह है कि इस ओर ध्यान देने की जरूरत है अवैध खनन और प्रदूषण के कारण नदियों का जलस्तर घटने लगा है,जगह जगह से नदी की धारा टूटने लगी है कई क्षेत्रों में नदी को देख कर लगता है कि शायद सूखने की कगार पर पहुंच गई है। जल बचाओ अभियान चलाने वालों को सिर्फ फोटो पोस्ट करने से ही फुर्सत नहीं मिलती। जिले की नदियों के हालात की ओर ध्यान ना देना अपनी जिम्मेवारियों से विमुख होने जैसा है।क्या गंगा और यमुना नदी को ही स्वच्छ रखने की जरूरत है ,क्या हमारे जिले को सतत जल की आपूर्ति करने वाली नदियों की ओर ध्यान नहीं दिया जाना चाहिए।

दुर्दशा पर आंसु बहाते जिले में संचालित आंगनबाड़ी केंद्र।


नरसिंहपुर।
जिले में बहुत से आंगनबाड़ी केंद्र किराए के कमरे में संचालित किए जा रहे हैं, कमरे की हालत देखकर आप अंदाजा लगा सकते हैं कि बच्चों के लिए शासन द्वारा प्रदत्त सुविधाएं किस तरह उपलब्ध करवाई जाती है।अपनी जेबें भरने से ही कर्मचारियों को फुरसत नहीं मिलती,शासन द्वारा प्रदत्त सुविधाएं बच्चों को मुहैया नहीं कराई जाती है।ईमानदार कर्मचारी अपना कार्य जिम्मेदारी से करना चाहते हैं तो भ्रष्ट अधिकारी दबाव बना कर कार्य शैली को प्रभावित करते हैं। जर्जर मकानों में संचालित केंद्र कभी भी दुर्घटना का शिकार हो सकते हैं परन्तु जिम्मेवार अधिकारियों का ध्यान इस ओर नहीं जाता।

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