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जिले से सटे ग्रामीण क्षेत्रों में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र एवम् उप स्वासथ्य केंद्र नाम मात्र के लिए रह गए हैं, हालात ये हैं कि ६ विकासखंड के लगभग एक हजार गांव के लोग बीमार होने पर जिला अस्पताल या झोलाछाप डॉक्टरों के पास इलाज कराने जाते हैं, स्तिथि यह है कि गाँव में कभी डॉक्टर समय पर उपलब्ध नहीं होते, दवाओं की स्थिति तो और भी बदतर है, मरीजों को कभी भी दवा उपलब्ध नहीं हो पाती।यह स्थिति तब है जब जिले में लगभग १४४ उपस्वास्थ्य केंद्र एवम् लगभग २० से अधिक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र है,परन्तु स्वास्थ्य विभाग की समस्त सुविधाएं नदारद है। आखिर कब तक इस व्यवस्था में बदलाव होगा, जनता की सेवा के नाम पर अधिकारियों के लिए लाखों रुपए खर्च करने वाली सरकार को इस मामले में कड़ा रुख अख्तियार करना चाहिए। अन्यथा विकास के खोखले दावे सिर्फ आंकड़ों में ही सिमट कर रह जाएंगे।
जिले से सटे ग्रामीण क्षेत्रों में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र एवम् उप स्वासथ्य केंद्र नाम मात्र के लिए रह गए हैं, हालात ये हैं कि ६ विकासखंड के लगभग एक हजार गांव के लोग बीमार होने पर जिला अस्पताल या झोलाछाप डॉक्टरों के पास इलाज कराने जाते हैं, स्तिथि यह है कि गाँव में कभी डॉक्टर समय पर उपलब्ध नहीं होते, दवाओं की स्थिति तो और भी बदतर है, मरीजों को कभी भी दवा उपलब्ध नहीं हो पाती।यह स्थिति तब है जब जिले में लगभग १४४ उपस्वास्थ्य केंद्र एवम् लगभग २० से अधिक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र है,परन्तु स्वास्थ्य विभाग की समस्त सुविधाएं नदारद है। आखिर कब तक इस व्यवस्था में बदलाव होगा, जनता की सेवा के नाम पर अधिकारियों के लिए लाखों रुपए खर्च करने वाली सरकार को इस मामले में कड़ा रुख अख्तियार करना चाहिए। अन्यथा विकास के खोखले दावे सिर्फ आंकड़ों में ही सिमट कर रह जाएंगे।