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नगर में इस समय नवरात्र पूजन की तैयारियां जोरों शोरों के साथ चल रही है। वहीं दूसरी ओर धर्म के नाम पर पाखंड कि दुकान सजाने वालो की भी कमी नहीं है। कोई लड़का होने की दवा बेच रहा है, तो कोई आधी रात के अंधेरे में गड़ा हुआ धन खोजने का दावा करता है,और तो और प्रेत व्याधि बता कर लूटने वालों की भी कमी नहीं है। महिलाओं को प्रेत व्याधि के नाम पर उत्पीड़ित होना पड़ता है, धर्म की आड़ में मानसिक प्रताड़ना से लेकर शारीरिक शोषण का खेल चलता रहता है।शिक्षित समाज मुक दर्शक बना देखता रहता है सत्यता को जानने के बाद भी कोई आवाज नहीं उठाता।
नगर में इस समय नवरात्र पूजन की तैयारियां जोरों शोरों के साथ चल रही है। वहीं दूसरी ओर धर्म के नाम पर पाखंड कि दुकान सजाने वालो की भी कमी नहीं है। कोई लड़का होने की दवा बेच रहा है, तो कोई आधी रात के अंधेरे में गड़ा हुआ धन खोजने का दावा करता है,और तो और प्रेत व्याधि बता कर लूटने वालों की भी कमी नहीं है। महिलाओं को प्रेत व्याधि के नाम पर उत्पीड़ित होना पड़ता है, धर्म की आड़ में मानसिक प्रताड़ना से लेकर शारीरिक शोषण का खेल चलता रहता है।शिक्षित समाज मुक दर्शक बना देखता रहता है सत्यता को जानने के बाद भी कोई आवाज नहीं उठाता।
