नरसिंहपुर।
कभी शहर के प्राण कहलाने वाला बस स्टैंड आज अपनी दुर्दशा पर आंसु बहा रहा है। यहां वहां मवेशियों ने डेरा जमा रखा है,कचरे का ढेर लगा हुआ है लोग सुलभ शौचालय का उपयोग ना कर बाहर ही गन्दगी फैला रहे है। आर. टी. ओ. कार्यालय के सामने बिना किसी हिचक के वाहन खड़ा कर लोग दुर्घटना को न्योता देते हुए महसूस होते हैं। शराबी शाम को जाम छलकाते हुए देखे जा सकते हैं। स्वछता नियम की धज्जियां उड़ती हुई दिखती है। नए बस स्टैंड का विकास होना चाहिए परन्तु क्या पुराने बस स्टैंड को उपेक्षित छोड़ देना कहां तक उचित है।
कभी शहर के प्राण कहलाने वाला बस स्टैंड आज अपनी दुर्दशा पर आंसु बहा रहा है। यहां वहां मवेशियों ने डेरा जमा रखा है,कचरे का ढेर लगा हुआ है लोग सुलभ शौचालय का उपयोग ना कर बाहर ही गन्दगी फैला रहे है। आर. टी. ओ. कार्यालय के सामने बिना किसी हिचक के वाहन खड़ा कर लोग दुर्घटना को न्योता देते हुए महसूस होते हैं। शराबी शाम को जाम छलकाते हुए देखे जा सकते हैं। स्वछता नियम की धज्जियां उड़ती हुई दिखती है। नए बस स्टैंड का विकास होना चाहिए परन्तु क्या पुराने बस स्टैंड को उपेक्षित छोड़ देना कहां तक उचित है।

