नरसिंहपुर।
सरकार से अच्छी खासी तनख्वाह लेने के बाद भी डॉक्टर्स सिर्फ ओपचारिक इलाज ही मरीजों को उपलब्ध करा रहे हैं।मरीज का आधा इलाज जिला चिकित्सालय में होता है तथा आधा क्लीनिक में बुलाकर किया जाता है।दरअसल डॉक्टर्स मरीज को नोट छापने की मशीन समझते हैं। स्थिति तो यहां तक बिगड़ गई है कि जांच रिपोर्ट आने तक डॉक्टर चिकित्सालय में रुकना भी मुनासिब नहीं समझते और अपनी ड्यूटी बजाकर क्लीनिक में जाकर बैठना उचित समझते हैं।जिला चिकित्सालय में कम ड्यूटी और मोटी रकम तनख्वाह लेने के बाद भी निजी क्लीनिक में २०० से ५०० रुपए ऐंठे जाते हैं। कोई गरीब जिला चिकित्सालय में भर्ती होने जाता है तो उसे अपने क्लीनिक में बुलाकर सुविधाओं के नाम पर स्वयं के हॉस्पिटल में भर्ती होने के लिए कहा जाता।
