आस पास।
ग्राम बहोरीपार में स्थित शासकीय विद्यालय में छात्राओं से झाड़ू लगाने का कहकर कक्षा शिक्षिका क्लास रूम में फर्श पर ही चैन से सो जाती हैं। स्थिति यहां तक गम्भीर हो गई है कि बच्चे बाहर सड़क पर खेलते देखे जा सकते हैं परन्तु विद्यालय के जिम्मेदारों को इसकी तनिक भी चिंता नहीं।ये कैसा दुर्भाग्य है की विद्या के मंदिर में छात्राओं से दुर्व्यवहार किया जा रहा है।शासन की तमाम योजनाओं को चुना लगाकर प्राचार्य और शिक्षक दोनों ही मनमानी पर उतारू है।क्या कक्षा में सो जाना,बच्चों पर ध्यान नहीं देना ही अपने पद का सदुपयोग करना है। कैसी विडम्बना है एक ओर तो कहा जाता है कि बेटी बचाओ,बेटी पढ़ाओ परंतु ग्रामीण इलाकों में शिक्षकों की कार्यप्रणाली संतोष जनक नहीं है।बच्चियों से काम करवाकर और स्वयं विश्राम करना कहां तक उचित है।भय के कारण कोई भी आवाज तक नहीं उठाता।जिस देश के बच्चे आज भय के माहौल में पलते हों वहां सच की शिक्षा कोरी नजर आ रही है। भ्रष्टाचार से मुक्ति,सच का साथ देना,अन्याय सहन नहीं करना, कहां है यह शिक्षाएं।