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जिले के समीपवर्ती क्षेत्र बहोरीपार में संचालित आंगनबाड़ी केंद्र की संचालिका एवम् सहायिका द्वारा कर्तव्य का पालन नहीं किया जा रहा है, बच्चों को ठंडे फर्श पर बैठाकर भोजन वितरण किया जाता है सहायिका के अनुसार केंद्र में ४५ बच्चे हैं(कक्ष में भोजन के समय मात्र बारह बच्चे उपस्थित थे।) परन्तु ग्लास चार ही उपलब्ध है बच्चे हैंडपंप चलाकर पानी पीते हैं ,अक्सर इस धक्का मुक्की में बच्चे गिरकर घायल हो जाते हैं। हैरानी हुई जानकर कि गांव में एक भी कुपोषित बच्चा नहीं है परन्तु तभी अचानक सहायिका द्वारा बताया गया कि गांव में एक कुपोषित बच्चा है जिसकी उम्र मात्र पांच माह है।ग्राम वासियों द्वारा चर्चा के दौरान बताया गया कि केंद्र संचालिका एवम् सहायिका द्वारा बच्चों के साथ भेदभाव किया जाता हैं,बच्चे डर के कारण आंगनबाड़ी केंद्र नहीं जाते हैं यही वजह है कि केंद्र में बच्चे कम ही दिखाई देते हैं।शासन का रवैया भी केंद्रों के साथ उपेक्षात्मक है तीन चार माह में एक बार खाद्य सामग्री भेजी जाती है वह भी पर्याप्त प्रदान नहीं की जाती है।शासन की योजनाओं का बंटाधार करने में बहोरीपार आंगनबाड़ी केंद्र भी किसी से कम नहीं है।


