आस पास।
नर्मदा से लगे हुए गांव में रहने वाले अधिकतर बच्चों का बचपन चंद सिक्कों के खातिर अशिक्षा और बाल मजदूरी की भेंट चढ़ जाता है। पैसों के लालच में आकर माता पिता भी बच्चों को नदी में से नारियल, पैसे एवम अन्य सामग्री निकालने से मना नहीं करते। गरीबी के बोझ में दबा बचपन मां नर्मदा की लहरों में खेलता हुआ अपनी जान जोखिम में डालकर अन्य किसी खतरे की परवाह किए बिना छोटे छोटे कंधों पर जिम्मेदारियों बोझ उठाए आसानी से देखे जा सकते हैं परन्तु किसी को सुध लेने की जरूरत महसूस नहीं होती हैं।समाज का एक हिस्सा अब भी बच्चों का सहारा लेकर अपने पेट की आग शांत करने को मजबुर है। कुछ नशे बाज़ किस्म के लोग भी इस तरह की हरकतों को अंजाम देते हैं।
