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शासन की उपेक्षा का शिकार प्राथमिक विद्यालय।

शासन की उपेक्षा का शिकार प्राथमिक विद्यालय।


नरसिंहपुर।
जिले के समीपवर्ती क्षेत्र ग्राम मगरधाऔर कारकबेल एवम् अन्य ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित प्राथमिक विद्यालय की दयनीय स्थिति देखकर आप अंदाजा नहीं लगा सकते कि गांव के इस विद्यालय में शौचालय की सुविधा भी उपलब्ध नहीं है।भवन का एक हिस्सा टूटकर गिर जाने के बाद प्रशासन को भवन की मरम्मत के लिए कई बार आवेदन दिए जाने के बाद भी ना तो शौचालय की व्यवस्था की गई और ना ही भवन की मरम्मत की ओर ध्यान देना आवश्यक माना गया विद्यालय में शिक्षिकाओं को भी शौचालय उपलब्ध नहीं होने के कारण समस्या का सामना करना पड़ रहा है।प्रा शाला के दो कक्षों में पांच कक्षाएं संचालित की जा रही है कक्षा में प्रकाश ओर हवा की उचित व्यवस्था नहीं है विद्यालय की तरफ से इस संबंध में कई बार आवेदन दिए जा चुके हैं परन्तु आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। मध्याह्न भोजन योजना के वितरण में भी अनियमितताएं बरती जा रही है भोजन की गुणवत्ता का स्तर , बच्चों से बर्तन साफ करवा कर उन्हें प्रताड़ित किया जा रहा है। बच्चों को प्रताड़ित करने के बाद भी समूह अपनी गलती मानने को तैयार नहीं होते क्योंकि लगातार शिकायत करने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं होने से समूह अपनी मनमानी पर उतारू है।

अवैध दोहन से छलनी होता नदियों का सीना और जल स्तर में गिरावट।।


नरसिंहपुर।
जिले की नदियों की स्थिति इतनी भयावह है कि इस ओर ध्यान देने की जरूरत है अवैध खनन और प्रदूषण के कारण नदियों का जलस्तर घटने लगा है,जगह जगह से नदी की धारा टूटने लगी है कई क्षेत्रों में नदी को देख कर लगता है कि शायद सूखने की कगार पर पहुंच गई है। जल बचाओ अभियान चलाने वालों को सिर्फ फोटो पोस्ट करने से ही फुर्सत नहीं मिलती। जिले की नदियों के हालात की ओर ध्यान ना देना अपनी जिम्मेवारियों से विमुख होने जैसा है।क्या गंगा और यमुना नदी को ही स्वच्छ रखने की जरूरत है ,क्या हमारे जिले को सतत जल की आपूर्ति करने वाली नदियों की ओर ध्यान नहीं दिया जाना चाहिए।

दुर्दशा पर आंसु बहाते जिले में संचालित आंगनबाड़ी केंद्र।


नरसिंहपुर।
जिले में बहुत से आंगनबाड़ी केंद्र किराए के कमरे में संचालित किए जा रहे हैं, कमरे की हालत देखकर आप अंदाजा लगा सकते हैं कि बच्चों के लिए शासन द्वारा प्रदत्त सुविधाएं किस तरह उपलब्ध करवाई जाती है।अपनी जेबें भरने से ही कर्मचारियों को फुरसत नहीं मिलती,शासन द्वारा प्रदत्त सुविधाएं बच्चों को मुहैया नहीं कराई जाती है।ईमानदार कर्मचारी अपना कार्य जिम्मेदारी से करना चाहते हैं तो भ्रष्ट अधिकारी दबाव बना कर कार्य शैली को प्रभावित करते हैं। जर्जर मकानों में संचालित केंद्र कभी भी दुर्घटना का शिकार हो सकते हैं परन्तु जिम्मेवार अधिकारियों का ध्यान इस ओर नहीं जाता।
ग्राम मगरधा,नयागांव , करकबेल, बेदू , नादिया मध्याह्न भोजन योजना में गड़बड़ी।

ग्राम मगरधा,नयागांव , करकबेल, बेदू , नादिया मध्याह्न भोजन योजना में गड़बड़ी।

नरसिंहपुर।
बच्चों के सम्पूर्ण विकास के लिए शासन द्वारा चलाई जा रही योजनाओं का क्रियान्वयन किस प्रकार संचालित किया जा रहा है प्रशासन की यह जानने में कोई रुचि नहीं दिखाई देती। जिले के संचालित मध्याह्न भोजन योजना को किस तरह पलीता लगाया जा रहा है,यह किसी भी भोजन समूह का निरीक्षण कर आसानी से समझा जा सकता है।परंतु अधिकारियों की मिलीभगत के चलते कोई शिकायत दर्ज ही नहीं की जाती हैं।मुख्य समस्या भोजन की गुणवत्ता के अलावा एक और है कि बच्चों को भोजन के बाद अपने बर्तन मांजने पड़ते हैं।शासन और जनता को समूह भ्रमित करते हैं कि प्रशासन की ओर से बर्तन साफ करने के लिए किसी प्रकार का कोई नियम नहीं है जबकि नियम में यह स्पष्ट लिखा होता है कि भोजन पकाने और वितरण के बर्तन को साफ करने की जिम्मेदारी समूह की होगी।

बेलखेड़ा रेलवे फाटक बंद होने पर जान का जोखिम उठाते ग्रामीण।



ग्राम बेलखेड़ा।
वैसे तो रेलवे फाटक बंद होने की स्थिति में भी फाटक पार करने के दृश्य बहुत आम हो गए हैं परन्तु अपनी और अपनी जान जोखिम में डालकर ट्रैक पार करना कौन सी समझदारी की अक्सर यह बात केवल हादसे के शिकार हो चुके परिवार ही समझ पाते हैं। रेलवे के नियम अनुसार फाटक बंद होने की स्थिति में ट्रैक पार करना कानूनन जुर्म है परन्तु शायद ही कभी किसी पर इस नियम के तहत जुर्माना वसूला किया गया हो।

ग्राम घाट पिंडरई के निवासी नरकीय जीवन जीने को मजबुर।





घाट पिंडरई।
वैसे तो घाट पिंडरई तक जाने वाले मार्ग को देखकर आप सोच भी नहीं सकते कि गांव की स्थिति कितनी बद्तर है।गांव के अंदरप्रवेश करते ही सड़क जैसे अचानक कहीं छुप जाती है और सड़क की जगह गहरे गड्ढे दिखाई देने लगते हैं।स्वास्थ्य केंद्र भवन का निर्माण तो किया जा चुका है परन्तु स्वास्थ्य केंद्र जाने पर भवन भी अपनी दुर्दशा पर आंसु बहाता प्रतीत होता है।ऐसा ही कुछ हाल आंगनबाड़ी और प्रा. शाला का है बच्चे आंगनबाड़ी केंद्र एवम् शाला में कम सड़क पर खेलते हुए अधिक मिलते हैं। ग्रामीणों के अनुसार यहां अपात्रों को योजनाओं का लाभ सरपंच द्वारा आसानी से प्राप्त हो जाता है पर पात्र हितग्राही दरबदर भटकने को मजबुर है, पेयजल आपूर्ति की आड़ में चहेतों के निवास के आस पास नल या हैंडपंप लगवा कर पेयजल योजना का भी बंटाधार कर दिया गया है। ग्रामीणों की स्थिति इतनी भयावह है कि वे किसी से शिकायत भी नहीं कर सकते हैं।

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