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मानवता हुई शर्मसार नरसिंहपुर रेलवे स्टेशन।




नरसिंहपुर।
शिक्षित होने के बाद भी मनुष्य कितना संवेदन हीन हो गया है इस घटना क्रम को ध्यानपूर्वक पढ़कर बहुत ही आसानी से समझा जा सकता है।
अमर कंटक एक्सप्रेस से नवजात शिशु रेल गेट से चंद मीटर दूर गिर जाता है स्थानीय लोगों के द्वारा 108 को कॉल कर बुलवाया गया तब 108 के चालक अनिल रजक ने नवजात शिशु को ऑक्सीजन देकर बच्चें की जान बचाई। नवजात की गम्भीर स्थिति को देखते हुए जबलपुर रेफर कर दिया गया है परन्तु इस संबंध में समाचार लिखने तक परिजनों द्वारा अब तक कोई खोज खबर नहीं की गई है।

दीपावली का त्योहार और मंहगाई कि  मार नरसिंहपुर।

दीपावली का त्योहार और मंहगाई कि मार नरसिंहपुर।


नरसिंहपुर।
महंगाई से जूझ रही आम जनता में दीपावली का उत्साह विगत वर्ष की अपेक्षा खास नजर नहीं आया।बाजार में भी त्योहार कि चमक फीकी रही।अधिकतर समय बाजार में चहल पहल नजर नहीं आयी।सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाला व्यापार पटाखों का रहा।जहां एक ओर लोगों ने खरीदी की परंतु चेहरे पर मायूसी नजर आ रही थी।लोगों से बात करने पर पता चला कि चाइना पटाखों के विरोध का दुकानदारों द्वारा जमकर फायदा उठाया जा रहा है,देसी पटाखों के नाम पर महंगे पटाखे थमाए जा रहे हैं,अधिकतर पटाखों की कीमतों में ६०% से अधिक का उछाल आया। मध्यम वर्ग और गरीब का ध्यान रखने का दावा करने वाली सरकार कीमतों पर नियंत्रण हेतु विशेष कुछ नहीं कर सकी। ग्रामीण क्षेत्रों की जनता में खासा आक्रोश देखा गया दीवाली के पहले किसानों का भुगतान करना भी जरूरी नहीं समझा गया।गरीब मजुदर वर्ग को शासन सिर्फ वोट मशीन समझता है।

जिला चिकित्सालय नरसिंहपुर कि ठप्प स्वास्थ्य सेवाएं।


नरसिंहपुर।
सरकार से अच्छी खासी तनख्वाह लेने के बाद भी डॉक्टर्स सिर्फ ओपचारिक इलाज ही मरीजों को उपलब्ध करा रहे हैं।मरीज का आधा इलाज जिला चिकित्सालय में होता है तथा आधा क्लीनिक में बुलाकर किया जाता है।दरअसल डॉक्टर्स मरीज को नोट छापने की मशीन समझते हैं। स्थिति तो यहां तक बिगड़ गई है कि जांच रिपोर्ट आने तक डॉक्टर चिकित्सालय में रुकना भी मुनासिब नहीं समझते और अपनी ड्यूटी बजाकर क्लीनिक में जाकर बैठना उचित समझते हैं।जिला चिकित्सालय में कम ड्यूटी और मोटी रकम तनख्वाह लेने के बाद भी निजी क्लीनिक में २०० से ५०० रुपए ऐंठे जाते हैं। कोई गरीब जिला चिकित्सालय में भर्ती होने जाता है तो उसे अपने क्लीनिक में बुलाकर सुविधाओं के नाम पर स्वयं के हॉस्पिटल में भर्ती होने के लिए कहा जाता।

साप्ताहिक बाजार नरसिंहपुर गन्दगी के माहौल में मिठाई की दुकानें।



नरसिंहपुर।
खाद्य विभाग की कार्य प्रणाली सदा ही संदेह के घेरे में रहती है।स्वछता और शुद्धता की जांच हेतु विभाग द्वारा त्योहार पर ही दिखावे की कार्यवाही की जाती है आमजन मानस में चर्चा है कि खाद्य विभाग की लापरवाही का खामियाजा जनता को भुगतना पड़ रहा है मिलावट खोर बेफिक्र होकर अपने काम को अंजाम देते हैं।परंतु विगत वर्षों में विभाग की कार्य प्रणाली संतोष जनक नहीं रही है।गुणवत्ताहीन सामग्री का उपयोग धड़ल्ले से इस्तेमाल किया जाता है,परंतु जनता के सेवक अधिकारियों के पास दुकानों की जांच करने का समय भी नहीं रहता है।

वन विभाग की लापरवाही के चलते सड़क पर मोर पंखों की अवैध बिक्री।




नरसिंहपुर।
प्रत्येक रविवार को आयोजित होने वाले साप्ताहिक बाजार में मोर पंखों की बिक्री कई संदेहों को जन्म देती है,मोर अपने पंख स्वयं छोड़ता है इसी कमजोर कड़ी का फायदा उठाकर मोर पंखों की खातिर मोर का शिकार करने से भी गुरेज नहीं करते।वन विभाग की लापरवाही कहें या मिलीभगत दोनों ही परिस्थितियों में मोर पंख बेचने वालों को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष तौर पर फायदा ही पहुंचता है। जिले में कितने व्यक्तियों या दुकानदारों को लाइसेंस जारी किए गए हैं क्या सड़क पर फेरी वालों को भी मोर पंख बेचने का लाइसेंस जारी किया जाता है। यह कुछ ऐसे ज्वलंत सवाल है जो वन विभाग की कार्य प्रणाली पर प्रश्न चिन्ह लगाते हैं।

असेम्बली हॉल की जर्जर बिल्डिंग में होता नशे का सेवन।


नरसिंहपुर।
जिले की शान रह चुके असेम्बली हॉल में जहां कभी सभाएं, गोष्ठियां हुआ करती थी,आज वहां मुख्य द्वार को तोड़कर नशे बाजों ने नशा करने का स्थान बना लिया है। स्थिति यह है कि शाम को अंधेरा घिरते ही असमाजिक तत्वों की भीड़ असेम्बली हॉल के आस पास मंडराने लगती है।कहने को तो शासन ने चौकीदार की नियुक्ति कर रखी है परन्तु अंधेरा होते ही वह भी नदारद रहता है।



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